24 june 2026,
देहरादून। उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर धामी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने का निर्णय लिया है। राज्य में 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड को भंग कर नई व्यवस्था लागू की जाएगी। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि मदरसों की पहचान पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उन्हें पहले की तरह ‘मदरसा’ नाम से ही मान्यता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने की दिशा में उठाया गया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था के जरिए मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा से बेहतर तरीके से जोड़ा जाएगा, जबकि उनकी पारंपरिक पहचान भी सुरक्षित रहेगी।
राज्य सरकार ने मदरसा संचालकों को राहत देते हुए मान्यता संबंधी प्रक्रिया को भी सरल बनाने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत आवेदन और मान्यता से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए हैं, जिससे छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित मदरसों को प्रशासनिक परेशानियों का सामना कम करना पड़ेगा। आवेदन शुल्क को लेकर भी संशोधित प्रावधान लागू किए जा रहे हैं ताकि संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
धामी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मान्यता प्राप्त मदरसों में अध्ययनरत छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगेगी। मिड-डे मील योजना समेत छात्रों के हित से जुड़ी व्यवस्थाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। सरकार का कहना है कि सुधार का उद्देश्य संस्थागत ढांचे को मजबूत करना है, न कि छात्रों को मिलने वाले लाभों में कटौती करना।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को नए ढांचे के तहत संचालित किया जाएगा। इससे शिक्षा की गुणवत्ता की निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही आधुनिक विषयों की पढ़ाई और शैक्षणिक मानकों को भी अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
राजनीतिक दृष्टि से भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धामी सरकार लगातार शिक्षा सुधार और प्रशासनिक पुनर्गठन को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करती रही है। ऐसे में मदरसा बोर्ड को भंग करने और नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय राज्य की शिक्षा नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
अब 1 जुलाई से लागू होने वाली नई व्यवस्था पर सभी की नजरें टिकी हैं। सरकार का दावा है कि इससे मदरसों की पहचान सुरक्षित रखते हुए शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

