देहरादून ; 11.10.2026,
देहरादून। विश्व हिंदू परिषद (VHP) की ओर से देहरादून में श्रद्धेय अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष समारोह का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उनके जीवन, विचारों, राष्ट्रसेवा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए किए गए कार्यों को याद किया गया। कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदू परिषद की पत्रिका ‘विश्व हिंदू’ में अशोक सिंघल के जीवन और राष्ट्रहित में उनके योगदान पर प्रकाशित विशेषांक का विमोचन भी किया गया।
समारोह में अशोक सिंघल के व्यक्तित्व और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, भारतीय परंपराओं के संरक्षण और समाज को एकजुट करने के संकल्प का प्रतीक रहा। उन्होंने अपने विचारों और सक्रिय भूमिका के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का प्रयास किया। भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को जनमानस तक पहुंचाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
राम जन्मभूमि आंदोलन में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
अशोक सिंघल राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन तक पहुंचाने और लोगों को इससे जोड़ने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके प्रयासों और लंबे सामाजिक जीवन को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके संकल्प, संगठन क्षमता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति समर्पण का उल्लेख किया।
कार्यक्रम में अयोध्या में निर्मित भव्य श्रीराम मंदिर को भारतीय समाज की आस्था और लंबे सांस्कृतिक संघर्ष की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राम मंदिर निर्माण को उस संकल्प की महत्वपूर्ण परिणति बताया गया, जिसके लिए अशोक सिंघल ने अपना जीवन समर्पित किया था। इस दौरान यह भाव भी व्यक्त किया गया कि यदि अशोक सिंघल आज जीवित होते, तो अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भव्य स्वरूप को देखकर उन्हें गहरी प्रसन्नता और आत्मिक संतोष की अनुभूति होती।
विशेषांक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचेगा उनका योगदान
‘विश्व हिंदू’ पत्रिका के विशेषांक का विमोचन समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। इस विशेषांक के माध्यम से अशोक सिंघल के जीवन, उनके विचारों और राष्ट्र तथा समाज के प्रति उनके योगदान को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। ऐसे प्रकाशनों को उनके व्यक्तित्व और कार्यों से नई पीढ़ी को परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।
जन्म शताब्दी वर्ष के आयोजन के माध्यम से उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को स्मरण करने और उनके विचारों पर चर्चा करने का अवसर मिला। समारोह ने राष्ट्रसेवा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सामाजिक एकजुटता जैसे विषयों को भी केंद्र में रखा।
संतों और विहिप पदाधिकारियों की रही उपस्थिति
इस कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रवींद्र पुरी, विभिन्न संत-महात्मा, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने अशोक सिंघल के जीवन और उनके योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
देहरादून में आयोजित यह कार्यक्रम अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष की शुरुआत के साथ उनके विचारों, सांस्कृतिक दृष्टिकोण और राष्ट्र के प्रति समर्पण को फिर से चर्चा के केंद्र में लाने का अवसर बना।

