देहरादून ; 19.08.2026।
देहरादून। क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये जुटाने के आरोप में लविश चौधरी के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया है। ताजा मामले में करीब 160 लोगों से 12 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लिए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता अनूप सिंह की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद न्यायालय के आदेश पर रायपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रायपुर क्षेत्र के नत्थूवाला निवासी अनूप सिंह ने अदालत को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि मुजफ्फरनगर के घासीपुरा निवासी लविश चौधरी उर्फ नवाब अली अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को ट्रेडिंग में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करता था। शिकायत में बोटब्रो, यार्कर एफएक्स, यार्कर कैपिटल और बोट अल्फा नाम के प्लेटफॉर्म का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इन माध्यमों से क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश का अवसर बताकर लोगों से रकम जमा कराई गई।
मुनाफे के भरोसे पर निवेश कराने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, निवेशकों को ट्रेडिंग के जरिए बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद दिखाई गई। इसी भरोसे के चलते कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी इन प्लेटफॉर्म से जुड़े निवेश में लगा दी। आरोप है कि समय के साथ निवेशकों की संख्या बढ़ती गई और बड़ी मात्रा में रकम एकत्र हो गई। बाद में जब लोगों ने अपनी रकम वापस लेने का प्रयास किया तो कथित तौर पर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा।
अनूप सिंह की ओर से अदालत में दिए गए विवरण में करीब 160 लोगों के प्रभावित होने की बात कही गई है। इन निवेशकों से ली गई रकम का कुल आंकड़ा 12 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। हालांकि, इस रकम और निवेशकों की संख्या की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकेगी।
अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस
शिकायतकर्ता ने मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद प्रकरण न्यायालय तक पहुंचा। अपर सिविल जज देहरादून की अदालत में प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में रायपुर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई है।
अब जांच में यह देखा जाएगा कि निवेशकों से रकम किस माध्यम से ली गई, पैसा किन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों में पहुंचा और संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का संचालन किस तरह किया जा रहा था। पुलिस निवेश से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और शिकायतकर्ताओं के बयान भी जांच का हिस्सा बना सकती है।
25 करोड़ की कथित ठगी का मामला भी दर्ज
लविश चौधरी के खिलाफ रायपुर थाने में पहले भी करीब 25 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। पुराने मामले के बाद अब 12 करोड़ रुपये से अधिक की रकम से जुड़ी नई शिकायत सामने आने से प्रकरण गंभीर हो गया है।
दोनों मामलों में सामने आ रहे आरोपों को देखते हुए जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि क्या निवेशकों को एक ही तरीके से अपने जाल में फंसाया गया और क्या अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के पीछे एक ही नेटवर्क काम कर रहा था। साथ ही पुलिस यह भी जांच सकती है कि कथित रूप से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया गया।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल नए मुकदमे में लगाए गए आरोपों की पुलिस स्तर पर जांच की जा रही है। करीब 160 लोगों से जुड़ी शिकायत और 12 करोड़ रुपये से अधिक की कथित रकम के चलते मामले में वित्तीय लेनदेन की जांच अहम मानी जा रही है। पुलिस की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कितने निवेशकों से कितनी रकम ली गई और पूरे मामले में आरोपित की भूमिका कितनी थी।
वहीं, पहले से दर्ज करीब 25 करोड़ रुपये के मामले के साथ नए मुकदमे को भी जोड़कर देखा जाता है या नहीं, यह जांच की दिशा पर निर्भर करेगा। फिलहाल पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

