15 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। उत्तराखंड सरकार वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रही है। राज्य में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जा रही है, जो उपग्रह चित्रों और ड्रोन से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर जंगलों में होने वाले हर छोटे-बड़े बदलाव पर नजर रखेगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अवैध कब्जों की समय रहते पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
वन विभाग के अनुसार नई एआई प्रणाली के लिए एक विशेष एप्लीकेशन तैयार की जा रही है। यह एप्लीकेशन नियमित अंतराल पर प्राप्त सैटेलाइट इमेज और ड्रोन सर्वे के डेटा की तुलना करेगी। यदि किसी वन क्षेत्र में अवैध निर्माण, पेड़ों की कटाई, भूमि की घेराबंदी या अन्य संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा। इससे मौके पर तेजी से जांच और कार्रवाई करना आसान होगा।
मुख्य वन संरक्षक एवं अतिक्रमण हटाओ अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि इस प्रणाली को लागू करने से पहले प्रदेश के सभी प्रभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ) से इसका विस्तृत परीक्षण कराया जाएगा। परीक्षण के दौरान मिलने वाले सुझावों के आधार पर एप्लीकेशन में आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
वन विभाग का मानना है कि नई तकनीक के इस्तेमाल से निगरानी पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और सटीक होगी। इससे अतिक्रमण की जानकारी छिपाने, लापरवाही बरतने या किसी भी स्तर पर मिलीभगत की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। अधिकारियों को वास्तविक समय में सूचना मिलने से कार्रवाई की गति भी तेज होगी।
सरकार का लक्ष्य राज्य में वन भूमि पर हुए करीब 9,836 हेक्टेयर अतिक्रमण को चरणबद्ध तरीके से मुक्त कराना है। एआई आधारित निगरानी प्रणाली इस अभियान को मजबूत आधार देगी और भविष्य में नए अतिक्रमणों को शुरुआती स्तर पर ही रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो उत्तराखंड देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां वन संरक्षण के लिए एआई, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का व्यापक और प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल जंगलों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी नई दिशा मिलेगी।

