देहरादून ; 26.09.2026।
देहरादून। कराटे के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के खिलाड़ी हर्ष व्यास के खाते में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ने जा रही है। दक्षिण अफ्रीका के डर्बन में राष्ट्रमंडल प्रतियोगिता के वरिष्ठ कुमिते वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले हर्ष अब नवंबर में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने वाली राष्ट्रमंडल प्रतियोगिता में भारत की चुनौती पेश करेंगे। इस प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के शीर्ष खिलाड़ी अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे, ऐसे में हर्ष के सामने भी कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी।
डर्बन में मिली कामयाबी ने हर्ष के अंतरराष्ट्रीय करियर को नई पहचान दी। स्वर्ण पदक हासिल करने के बाद उन्होंने अपनी तैयारियों की रफ्तार कम नहीं की, बल्कि आगामी प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए अभ्यास जारी रखा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए उन्होंने अपने खेल के विभिन्न पहलुओं को मजबूत किया और कई पदक अपने नाम किए।
34 देशों के खिलाड़ी होंगे आमने-सामने
ग्लासगो में होने वाली प्रतियोगिता में 34 देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। अलग-अलग देशों से आने वाले खिलाड़ियों की तकनीक, गति और मुकाबले की शैली अलग होगी। ऐसे माहौल में हर्ष को अपने अनुभव और प्रशिक्षण का पूरा इस्तेमाल करना होगा। उनका लक्ष्य मुकाबले के दौरान धैर्य बनाए रखते हुए अपनी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करना है।
हर्ष लंबे समय से ग्लासगो प्रतियोगिता की तैयारियों में जुटे हैं। उनके प्रशिक्षण में केवल कराटे की तकनीक ही शामिल नहीं है, बल्कि फिटनेस, गति, सहनशक्ति, प्रतिक्रिया क्षमता और मुकाबले के दौरान परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मेहनत और अनुशासन को मानते हैं सफलता की कुंजी
हर्ष के मुताबिक किसी भी खिलाड़ी के लिए लगातार अभ्यास और अनुशासन उसकी तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका कहना है कि मैदान पर उतरने के बाद परिस्थितियां हमेशा खिलाड़ी की योजना के मुताबिक नहीं रहतीं। ऐसे में प्रतिद्वंद्वी के खेल को समझकर तुरंत रणनीति बदलने की क्षमता भी जरूरी होती है।
उन्होंने कहा कि कराटे में सही तकनीक के साथ समय का सही चुनाव बेहद अहम होता है। कई बार मुकाबले में कुछ सेकंड का निर्णय ही खिलाड़ी को बढ़त दिला सकता है। इसलिए वह अपने प्रशिक्षण के दौरान तकनीक के साथ-साथ टाइमिंग और रणनीतिक फैसलों पर भी लगातार काम कर रहे हैं।
हर्ष का मानना है कि खेल में जीत और हार दोनों से सीख मिलती है। उनके अनुसार प्रत्येक मुकाबले के बाद खिलाड़ी को अपने प्रदर्शन का आकलन करना चाहिए और जिन क्षेत्रों में कमी नजर आए, उन पर अगली प्रतियोगिता से पहले मेहनत करनी चाहिए। इसी सोच के साथ वह ग्लासगो के मुकाबलों की तैयारी कर रहे हैं।
प्रतियोगिता से पहले लिया आशीर्वाद
ग्लासगो रवाना होने से पहले हर्ष ने श्री दरबार साहिब में माथा टेका। इसके बाद उन्होंने दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज के पूजनीय महंत एवं श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष देवेंद्र दास महाराज से आशीर्वाद लिया। देवेंद्र दास महाराज ने हर्ष को आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके बेहतर प्रदर्शन और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
हर्ष ने भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जब खिलाड़ी भारत की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में उतरता है तो उसके सामने व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ देश का नाम ऊंचा करने की जिम्मेदारी भी होती है।
डर्बन की उपलब्धि से बढ़ा आत्मविश्वास
वर्ष 2024 में दक्षिण अफ्रीका के डर्बन में आयोजित राष्ट्रमंडल प्रतियोगिता में हर्ष ने वरिष्ठ कुमिते वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इस सफलता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आत्मविश्वास दिया। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी निरंतरता बनाए रखी।
अब ग्लासगो में उनके सामने डर्बन की सफलता को दोहराने से बड़ी चुनौती अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने की है। इसके लिए वह अभ्यास सत्रों में अपनी तकनीकी कमियों को दूर करने के साथ मुकाबले की परिस्थितियों पर भी काम कर रहे हैं।
हर्ष ने कहा कि उनका सपना अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीतना है। फिलहाल उनका पूरा ध्यान ग्लासगो प्रतियोगिता पर केंद्रित है। वह वहां पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ उतरना चाहते हैं। उनके लिए यह प्रतियोगिता केवल एक और मुकाबला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाई देने का अवसर भी है।

