10 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के बीच प्रशासनिक तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को जिलों की स्थिति पर सीधी नजर डाली। मुख्यमंत्री आवास से हुई वर्चुअल बैठक में उन्होंने जिलाधिकारियों से बारिश से जुड़ी चुनौतियों, यात्रा व्यवस्थाओं और जनहित के कामों की समीक्षा की। बैठक का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि मौसम खराब होने की स्थिति में सरकारी तंत्र की प्रतिक्रिया कितनी तेज हो और आम लोगों तक राहत व सुविधाएं बिना देरी के कैसे पहुंचें।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति को हल्के में न लिया जाए। जिलों में प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों को सक्रिय स्थिति में रखने के साथ ही अधिकारियों को हर समय उपलब्ध रहने को कहा गया। उन्होंने विशेष रूप से संपर्क व्यवस्था मजबूत रखने पर जोर दिया, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी जिले में तत्काल निर्णय लिया जा सके।
जहां बारिश ने बिगाड़ी सड़क, वहां बनेगा स्थायी समाधान
मानसून के दौरान जिन इलाकों में भारी बारिश के कारण सड़कें खराब हुई हैं या रास्ते बंद हुए हैं, उनका अब व्यवस्थित ब्योरा तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जिलों को ऐसे स्थानों की सूची बनाने के निर्देश दिए हैं, जहां सड़क, संपर्क मार्ग या पानी की निकासी की व्यवस्था प्रभावित हुई है।
सरकार की कोशिश केवल अस्थायी तौर पर रास्ता खोलने तक सीमित नहीं रहने की है। बारिश का मौसम गुजरने के बाद क्षतिग्रस्त स्थानों पर स्थायी मरम्मत और पुनर्निर्माण की योजना तैयार कर काम शुरू किया जाएगा। ड्रेनेज व्यवस्था में सामने आई कमियों को भी इसी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
सड़क सुधार के लिए तय हुई समय सीमा
प्रदेश में खराब सड़कों को लेकर सरकार ने अब समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने जिलों को अपने क्षेत्र की सड़कों की वास्तविक स्थिति के आधार पर अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। काम की प्रगति पर नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाएगी।
सरकार ने मानसून के बाद 15 अक्टूबर तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में आने वाले समय में लोक निर्माण और संबंधित विभागों के सामने खराब सड़कों की पहचान से लेकर मरम्मत तक का काम तेजी से पूरा करने की चुनौती होगी।
सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने गांवों तक पहुंचेगा प्रशासन
मुख्यमंत्री ने सरकारी योजनाओं को लेकर भी जिलों को सक्रिय रहने को कहा। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत अभी जिन गांवों तक प्रशासनिक शिविर नहीं पहुंच पाए हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन शिविरों के जरिए ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ उनकी स्थानीय समस्याओं को सुनकर समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि ऐसे कार्यक्रम केवल आयोजन बनकर न रह जाएं, बल्कि लोगों को वास्तविक लाभ मिले।
हेल्पलाइन से लेकर सत्यापन तक, योजनाओं की होगी निगरानी
बैठक में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 की स्थिति की भी समीक्षा करने को कहा गया। सरकार का उद्देश्य शिकायतों के निस्तारण की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखना है।
वहीं, प्रदेश में चल रहे सत्यापन अभियान को गति देने के निर्देश भी दिए गए हैं। राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड समेत अलग-अलग सरकारी योजनाओं में ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते। सामने आने वाले मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है, ताकि सरकारी सुविधाओं का फायदा जरूरतमंद और पात्र परिवारों को ही मिले।
पुरानी ग्रामीण सड़कों का नए सिरे से होगा मूल्यांकन
ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों की भी समीक्षा की जाएगी। पांच साल की अवधि पूरी कर चुकी और खराब हालत में पहुंची सड़कों को अलग से चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन सड़कों की स्थिति का आकलन करने के बाद जरूरत के अनुसार डामरीकरण और अन्य सुधार कार्यों की योजना तैयार होगी। जहां आवश्यक होगा, वहां सड़क को लोक निर्माण विभाग के अधीन लाने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
कांवड़ यात्रा के बाद सफाई और नशे के खिलाफ अभियान पर नजर
कांवड़ यात्रा के बाद संबंधित क्षेत्रों में साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को गति बनाए रखने को कहा। यात्रा के दौरान बढ़े दबाव के बाद सार्वजनिक स्थानों और मार्गों की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने अवैध बिक्री और तस्करी पर सख्ती बरतने के साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की जरूरत भी बताई।
बैठक से साफ है कि सरकार की प्राथमिकता फिलहाल मानसून से जुड़ी आपात चुनौतियों के साथ-साथ सड़कों, ग्रामीण संपर्क, सरकारी योजनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े कामों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है।

