देहरादून ; 1 अक्टूबर 2026।
देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और उनके सामाजिक एवं आर्थिक हितों को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। नींबूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के वरिष्ठ नागरिक केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की अनुभव संपदा हैं। उनके अनुभव, संस्कार और मार्गदर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने दिव्यांगजन सिविल सर्विस कोचिंग का शुभारंभ किया। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 23 वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया गया। निबंध और पेंटिंग प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पांच छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए। इस पहल के जरिए वरिष्ठ पीढ़ी के अनुभव और युवा पीढ़ी की प्रतिभा को एक साथ जोड़ने का संदेश दिया गया।
एक क्लिक में पेंशन भुगतान
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान सितंबर माह की पेंशन राशि का ऑनलाइन भुगतान भी किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 9,93,886 पेंशनरों को कुल 147 करोड़ 34 लाख 53 हजार रुपये की राशि जारी की गई। धामी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पात्र वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन का लाभ समय पर और सुगम तरीके से मिले, ताकि उन्हें आर्थिक सहायता के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
राज्य में वरिष्ठ नागरिकों को प्रतिमाह 1500 रुपये की पेंशन दी जा रही है। योजना की एक प्रमुख विशेषता यह है कि पात्र पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग पेंशन का लाभ दिया जाता है। मुख्यमंत्री के अनुसार वर्तमान में 9 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक इस व्यवस्था से लाभान्वित हो रहे हैं।
परिवार से समाज तक वरिष्ठजनों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की मौजूदगी परिवार को स्थिरता और सुरक्षा का भाव देती है। उनके अनुभव बच्चों के संस्कार और उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने वरिष्ठजनों को परिवार की ऐसी ताकत बताया, जिससे नई पीढ़ी को जीवन के संघर्षों और परिस्थितियों को समझने की सीख मिलती है।
धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ-साथ वे स्वयं को उत्तराखंड का बेटा भी मानते हैं और प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा तथा सुविधाओं को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। उनके संबोधन में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान के साथ-साथ उनके लिए सरकारी योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर जोर दिखाई दिया।
वृद्धाश्रमों के विस्तार पर भी फोकस
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक आवासीय व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी राज्य सरकार की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान में बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं। वहीं देहरादून, अल्मोड़ा और चम्पावत में नए वृद्धाश्रम तैयार किए जा रहे हैं।
इसके अलावा हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल समेत विभिन्न स्थानों पर गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से भी वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं। इससे उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए वैकल्पिक सहारा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्हें परिवार के बाहर देखभाल और सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता होती है।
अधिकारों की सुरक्षा से तीर्थाटन तक योजनाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम लागू किया गया है। इसके माध्यम से वरिष्ठजनों के भरण-पोषण और अधिकारों से जुड़े मामलों को कानूनी संरक्षण देने की व्यवस्था की गई है।
वहीं दीनदयाल मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क तीर्थ यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में भी केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
‘एक पेड़ मां के नाम’ के साथ पर्यावरण का संदेश
कार्यक्रम को केवल सम्मान और पेंशन वितरण तक सीमित नहीं रखा गया। मुख्यमंत्री धामी ने परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने वरिष्ठजनों के कल्याण और उनके सम्मान के लिए उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई।
कार्यक्रम में विधायक सविता कपूर, दायित्वधारी राम चंद्र गौड़, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, सचिव श्रीधर बाबू अद्यांकी, निदेशक संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण संजय सिंह टोलिया, संयुक्त निदेशक जी.आर. नौटियाल, पूजा नेगी, हेमलता पाण्डेय, गोरधन सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान के साथ-साथ सरकार की उन योजनाओं को सामने लाने का अवसर भी बना, जिनके जरिए पेंशन, स्वास्थ्य, आवास, कानूनी संरक्षण और तीर्थाटन जैसी सुविधाओं को वरिष्ठजनों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

