देहरादून ; 28.09.2026।
देहरादून। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाई एल्टीट्यूड ट्रैकिंग के दौरान फंसे ट्रेकर्स और माउंटेनियर्स की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिल्ली प्रवास से लौटने के बाद सीधे राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, आईटी पार्क पहुंचे और वहां वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से फंसे लोगों की संख्या, उनकी लोकेशन, अब तक किए गए रेस्क्यू और शेष लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी ली।
बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग के दौरान कुल 179 ट्रेकर्स एवं माउंटेनियर्स के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें सबसे अधिक 136 लोग उत्तरकाशी जनपद में जबकि 43 लोग बागेश्वर जिले के पिंडारी क्षेत्र में फंसे बताए गए।
उत्तरकाशी में 40 लोगों को निकाला गया सुरक्षित
मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी में चलाए जा रहे बचाव अभियान की प्रगति पर विशेष रूप से जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि वहां फंसे 136 लोगों में से 40 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। वहीं, 40 अन्य लोगों ने फिलहाल बचाव दल के साथ वापस लौटने से इनकार किया है। इन लोगों ने अपनी यात्रा जारी रखने की इच्छा जताई है।
शेष ट्रेकर्स और माउंटेनियर्स को सुरक्षित निकालने के लिए स्थानीय मौसम, रास्तों की स्थिति और अन्य परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है। हालात अनुकूल होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन को दोबारा गति दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान के दौरान किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा से समझौता न हो और हर कदम स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उठाया जाए।
8 हेलीकॉप्टर राहत अभियान में तैनात
बचाव कार्य को प्रभावी बनाने के लिए राज्य में 8 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां सड़क या पैदल मार्ग से पहुंचना कठिन हो, वहां आवश्यकता के अनुसार हवाई संसाधनों का तत्काल उपयोग किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि रेस्क्यू के दौरान यदि किसी ट्रेकर या माउंटेनियर की तबीयत बिगड़ती है अथवा उसे तत्काल चिकित्सकीय मदद की जरूरत पड़ती है, तो उसे बिना देरी चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए हेली एंबुलेंस को स्टैंडबाय मोड में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू में शामिल सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुर्गम हिमालयी इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए रेस्क्यू टीमों को परिस्थितियों के अनुरूप तत्काल निर्णय लेने के लिए तैयार रहना होगा।
उत्तरकाशी डीएम से सीधे ली जमीनी जानकारी
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान उत्तरकाशी के जिलाधिकारी से भी फोन पर बात कर मौके की स्थिति की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने बताया कि मौसम और स्थानीय परिस्थितियों का आकलन करते हुए शेष ट्रेकर्स एवं माउंटेनियर्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अभियान फिर शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रेस्क्यू टीमों को आवश्यक उपकरण, वाहन, संचार व्यवस्था और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही अभियान की लगातार मॉनिटरिंग करने और किसी भी नई स्थिति की जानकारी तत्काल उच्च स्तर तक पहुंचाने को कहा गया।
प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ को अलर्ट रहने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और ट्रेकिंग के लिए पहुंचने वाले लोगों की सुरक्षा राज्य सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ काम करने को कहा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू किया जा सके। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि मौसम संबंधी चेतावनियों और स्थानीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं।
चारधाम यात्रा को लेकर भी हुई अहम समीक्षा
रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा के साथ मुख्यमंत्री ने बैठक में चारधाम यात्रा की वर्तमान व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से धामों और यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो और यात्रा मार्गों पर व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाए। उन्होंने साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन और यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने पर भी जोर दिया।
धार्मिक स्थलों पर स्थायी कचरा प्रबंधन की तैयारी
मुख्यमंत्री ने चारधाम सहित राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की स्थायी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन और चारधाम यात्रा का दायरा लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर कचरा प्रबंधन की दीर्घकालिक योजना तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने संबंधित विभागों को मिलकर ऐसा प्लान तैयार करने को कहा, जिसमें कचरे के संग्रहण, निस्तारण और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय और संवेदनशील पर्यावरण वाले क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था केवल मौजूदा जरूरतों तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाले वर्षों की आवश्यकताओं के अनुरूप टिकाऊ व्यवस्था तैयार की जाए।
लगातार निगरानी और बेहतर समन्वय पर जोर
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा की स्थिति में सरकारी तंत्र पूरी तत्परता से काम करे। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू अभियान में शामिल प्रत्येक टीम के पास आवश्यक संसाधन होने चाहिए और फंसे हुए लोगों तक सहायता पहुंचाने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने और संवेदनशील इलाकों में प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय रखने को कहा। साथ ही रेस्क्यू अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप समेत आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

