12.09.2026।
नोएडा। किसी मरीज के लिए जब जिंदगी और मौत के बीच का फासला कुछ मिनटों का रह जाए, तब हर सेकंड की अहमियत बढ़ जाती है। नोएडा में ऐसा ही एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया, जहां एक आर्मी अफसर के अंगदान से मिले दिल को एयरलिफ्ट के बाद ग्रीन कॉरिडोर के जरिए महज करीब 11 मिनट में अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस और मेडिकल टीम के बेहतर तालमेल ने इस चुनौतीपूर्ण सफर को समय रहते पूरा किया।
मामला चंडीगढ़ से जुड़ा है। एक आर्मी अफसर को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनके परिवार ने दुख की इस घड़ी में अंगदान का फैसला लिया। परिवार के इस निर्णय से न सिर्फ अंगदान के प्रति जागरूकता का संदेश गया, बल्कि एक गंभीर मरीज के लिए नई जिंदगी की उम्मीद भी बनी।
चंडीगढ़ से शुरू हुआ दिल का सफर
अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आर्मी अफसर का हृदय सुरक्षित तरीके से निकाला गया। इसके बाद उसे विमान के जरिए गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया। यहां से दिल को नोएडा स्थित फोर्टिस अस्पताल ले जाना था, जहां ट्रांसप्लांट के लिए मेडिकल टीम पहले से तैयार थी।
हिंडन एयरपोर्ट से अस्पताल तक की दूरी सामान्य परिस्थितियों में भी ट्रैफिक के कारण समय ले सकती थी। लेकिन ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल होने वाले अंग के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी वजह से पुलिस ने पहले से रूट तैयार कर ग्रीन कॉरिडोर बनाया।
ट्रैफिक के बीच पुलिस ने संभाली कमान
हिंडन एयरपोर्ट से हार्ट लेकर एंबुलेंस रवाना हुई तो गाजियाबाद पुलिस ने रास्ते को नियंत्रित करना शुरू किया। ट्रैफिक को व्यवस्थित करते हुए एंबुलेंस को बिना अनावश्यक रुकावट आगे बढ़ाया गया।
जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद पुलिस ने हिंडन एयरपोर्ट से मॉडल टाउन गोलचक्कर तक का रास्ता लगभग 9 मिनट 30 सेकंड में पूरा कराया। इसके बाद नोएडा पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर की जिम्मेदारी संभाली।
मॉडल टाउन से सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल तक का बाकी सफर भी बेहद तेजी से पूरा कराया गया। करीब डेढ़ मिनट में एंबुलेंस अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंच गई। इस तरह एयरपोर्ट से अस्पताल तक पूरा सफर लगभग 11 मिनट में पूरा हुआ।
अस्पताल में पहले से तैयार थी ट्रांसप्लांट टीम
हार्ट के नोएडा पहुंचने से पहले ही अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ की टीम पूरी तैयारी में थी। जैसे ही अंग अस्पताल पहुंचा, ट्रांसप्लांट से जुड़ी चिकित्सकीय प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
इस पूरे ऑपरेशन में मेडिकल टीम के साथ-साथ पुलिस की भूमिका भी बेहद अहम रही। सड़क पर ट्रैफिक को नियंत्रित करने, रास्ता खाली रखने और एंबुलेंस को लगातार आगे बढ़ाने के लिए दोनों शहरों की पुलिस ने समन्वय के साथ काम किया।
9 मिनट 30 सेकंड और डेढ़ मिनट का तालमेल
इस पूरे सफर की खासियत इसकी गति के साथ-साथ दोनों पुलिस बलों के बीच बेहतर समन्वय रहा। गाजियाबाद की सीमा में एंबुलेंस को तेजी से आगे बढ़ाया गया और निर्धारित प्वाइंट पर नोएडा पुलिस ने जिम्मेदारी संभाल ली।
नोएडा के ट्रैफिक डीसीपी अभय कुमार सिंह के मुताबिक, ऐसे मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रूट को लेकर पहले से तैयारी की गई थी और पुलिसकर्मियों ने एंबुलेंस के लिए रास्ता सुचारु रखा।
परिवार के फैसले ने दिया किसी और को जीवन का मौका
इस घटना का सबसे भावुक पहलू उस आर्मी अफसर के परिवार का निर्णय है। अपने प्रियजन को खोने के बावजूद परिजनों ने अंगदान की सहमति देकर यह सुनिश्चित किया कि उनके जाने के बाद भी उनके अंग किसी दूसरे जरूरतमंद के काम आ सकें।
एक परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था, लेकिन उसी निर्णय ने दूसरे परिवार के लिए उम्मीद का दरवाजा खोल दिया। आर्मी अफसर का दिल अब एक ऐसे मरीज के इलाज का हिस्सा बना, जिसके लिए ट्रांसप्लांट जीवन बचाने की महत्वपूर्ण कोशिश थी।
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि अंगदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी के जाने के बाद किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन का अवसर देने वाला मानवीय फैसला भी है। वहीं, ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्था यह साबित करती है कि प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य सेवाएं एक साथ मिलकर काम करें तो बेहद कम समय में भी जीवन बचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।

