देहरादून ; 07.09.2026।
देहरादून। उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों में विकास कार्यों को जरूरत और उपयोगिता के आधार पर आगे बढ़ाने की कवायद तेज हो गई है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत अब ऐसी परियोजनाओं पर फोकस किया जा रहा है, जिनसे सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के साथ कनेक्टिविटी, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। इसी सिलसिले में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति (एसएलएससी) की बैठक हुई।
बैठक में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के फेज-1 और फेज-2 के तहत प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की गई। अधिकारियों के सामने अलग-अलग विभागों से जुड़े विकास प्रस्ताव रखे गए, जिन पर विस्तार से चर्चा के बाद कई परियोजनाओं को संस्तुति दी गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि सीमावर्ती गांवों के लिए परियोजनाएं तैयार करते समय वहां की वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को केंद्र में रखा जाए। उन्होंने सड़क संपर्क को मजबूत करने के साथ विद्युत ग्रिड की पहुंच, मोबाइल एवं अन्य नेटवर्क सुविधाओं, टेलीविजन और संचार व्यवस्था के विस्तार पर विशेष ध्यान देने को कहा।
पर्यटन और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर जोर
बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने वाली योजनाओं को भी महत्वपूर्ण माना गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट तैयार किए जाएं, जिनसे गांवों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़े और इसका लाभ स्थानीय लोगों को रोजगार एवं आय के अवसरों के रूप में मिल सके।
उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों में केवल सड़क, बिजली और संचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। विकास योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना और लोगों को अपने क्षेत्र में ही आजीविका के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना भी होना चाहिए।
सेना और सुरक्षा बलों की जरूरतों को भी प्रस्तावों में जगह
मुख्य सचिव ने परियोजनाओं की तैयारी के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों की रणनीतिक जरूरतों को भी शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेना, एसएसबी और आईटीबीपी से संबंधित आवश्यक कार्यों को भी चिन्हित कर समिति के सामने रखा जाए, ताकि महत्वपूर्ण जरूरतों को विकास प्रस्तावों के साथ समुचित स्थान मिल सके।
संबंधित जिलों को अपने-अपने क्षेत्रों की प्राथमिक जरूरतों का आकलन करने के बाद परियोजनाओं का चयन करने को कहा गया है। इससे जिलावार परिस्थितियों के अनुसार योजनाओं की प्राथमिकता तय की जा सकेगी।
दूसरी योजनाओं से मिल सकेगा बजट तो बदलेगी सूची
बैठक में परियोजनाओं की फंडिंग को लेकर भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि यदि किसी प्रस्तावित कार्य के लिए केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य योजना से बजट उपलब्ध कराया जा सकता है तो उसे उसी योजना के माध्यम से पूरा कराने का प्रयास किया जाए।
ऐसी परियोजनाओं को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से हटाकर उनकी जगह दूसरे जरूरी कार्यों को शामिल किया जा सकता है। इससे कार्यक्रम के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल अधिक महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाले विकास कार्यों में किया जा सकेगा।
हर संबंधित जिले से पांच प्रमुख परियोजनाएं
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के फेज-1 और फेज-2 के अंतर्गत सभी परियोजनाओं की प्राथमिकता पहले तय की जाए और उसके बाद ही प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाएं। उन्होंने प्रत्येक संबंधित जनपद से पांच बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा।
इन परियोजनाओं में कनेक्टिविटी, बिजली, संचार, पर्यटन, बुनियादी सुविधाओं, रोजगार और आजीविका के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक का मुख्य उद्देश्य ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाना रहा, जिनका असर सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास पर लंबे समय तक दिखाई दे। जिलों से प्राप्त प्राथमिकताओं के आधार पर परियोजनाओं की सूची तैयार कर उन्हें क्रमवार केंद्र सरकार के समक्ष भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, डीजी कारागार अभिनव कुमार, सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, सी. रविशंकर, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भरणे समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

