देहरादून ; 06.09.2026।
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लगातार हो रही बारिश के बीच रविवार को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इमारत में छात्रों के लिए पीजी/हॉस्टल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। ताजा जानकारी के अनुसार, हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका बनी हुई है।
घटना रविवार दोपहर करीब 1:34 बजे सामने आई, जब पुलिस को इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके तुरंत बाद दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की। बाद में एनडीआरएफ समेत अन्य राहत एजेंसियों को भी बचाव अभियान में लगाया गया।
मलबे के नीचे छात्रों के दबे होने की आशंका
हादसे के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, ढही इमारत में छात्रों के रहने के लिए पीजी की व्यवस्था थी। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि दुर्घटना के समय बड़ी संख्या में छात्र अंदर मौजूद थे। कुछ रिपोर्टों में 30 से 50 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई है, हालांकि प्रशासन की ओर से फंसे लोगों की अंतिम संख्या की पुष्टि नहीं की गई है।
रेस्क्यू टीमों ने मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। शुरुआती चरण में निकाले गए कुछ लोगों की हालत गंभीर बताई गई थी। बाद के अपडेट में मृतकों की संख्या तीन तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
तंग गलियों में चुनौतीपूर्ण बना राहत अभियान
सत्य निकेतन का यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक है और यहां बड़ी संख्या में छात्रों के पीजी, हॉस्टल और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं। संकरी गलियों के कारण भारी मशीनरी को घटनास्थल तक पहुंचाने और मलबा हटाने में बचाव दलों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।
एनडीआरएफ की टीमें खोजी अभियान में जुटी हैं। मलबे के भीतर किसी व्यक्ति के जीवित होने की संभावना को देखते हुए बचावकर्मी बेहद सावधानी से मलबा हटाने का काम कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, संभावित रूप से अंदर फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के इंतजाम भी किए गए हैं।
इमारत की हालत और निर्माण नियमों पर उठे सवाल
हादसे के बाद इमारत की उम्र, उसकी संरचना और उसमें हुए संभावित निर्माण या मरम्मत कार्यों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, ढही इमारत को स्थानीय तौर पर ‘हॉस्टल डेज‘ के नाम से जाना जाता था और इसमें स्वीकृत निर्माण सीमा से अधिक मंजिलें होने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने इसे भवन नियमों के उल्लंघन से जुड़ा मामला बताया है।
कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था और लगातार बारिश के कारण पानी जमा होने से संरचना पर दबाव बढ़ा हो सकता है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मलबा पूरी तरह हटने और जांच पूरी होने से पहले हादसे की वास्तविक वजह पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
आसपास की इमारत भी खाली कराई गई
हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पास की एक अन्य इमारत को भी खाली कराया। अधिकारियों ने बताया कि पड़ोसी भवन की हालत भी चिंताजनक पाई गई, जिसके बाद उसे सील करने और वहां रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजने की कार्रवाई की गई।
मुख्यमंत्री ने दिए राहत कार्य तेज करने के निर्देश
दिल्ली सरकार की ओर से घटना पर गंभीर चिंता जताई गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संबंधित एजेंसियों को राहत और बचाव अभियान में पूरी ताकत लगाने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ, डीडीएमए, एमसीडी और अन्य एजेंसियां मिलकर मौके पर काम कर रही हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। हादसे के कारणों की विस्तृत जांच भी की जा रही है। बारिश के बीच हुए इस हादसे ने राजधानी में पुराने और अनधिकृत तरीके से बदले गए भवनों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

