देहरादून ; 06.092026।
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में रविवार को बारिश के बीच एक बड़ा हादसा सामने आया। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में दोपहर के समय एक तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर नीचे आ गिरी। इमारत के गिरते ही आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मलबे में करीब आठ लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अचानक भरभराकर गिरी इमारत
बताया जा रहा है कि हादसा साउथ कैंपस थाना क्षेत्र के सत्य निकेतन में हुआ। अचानक इमारत के ढहने से आसपास मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तेज आवाज के साथ मलबा नीचे गिरा और कुछ ही देर में मौके पर धूल और मलबे का ढेर जमा हो गया।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और दमकल विभाग को जानकारी दी। सूचना मिलते ही संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थिति को अपने नियंत्रण में लेते हुए बचाव कार्य शुरू किया।
दोपहर 1:30 बजे मिली हादसे की सूचना
दमकल विभाग को इमारत गिरने की जानकारी करीब दोपहर 1:30 बजे मिली। कॉल प्राप्त होते ही फायर ब्रिगेड की टीमें घटनास्थल की ओर रवाना हुईं। पुलिसकर्मियों ने भी मौके पर पहुंचकर इलाके को सुरक्षित करने की कार्रवाई शुरू की।
रेस्क्यू टीमों की प्राथमिकता मलबे के नीचे दबे संभावित लोगों तक पहुंचना है। इसके लिए मलबे को सावधानी से हटाया जा रहा है। बचावकर्मी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि मलबा हटाने के दौरान अंदर मौजूद किसी व्यक्ति को अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे।
मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका
हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जो इमारत के अंदर मौजूद हो सकते थे। शुरुआती जानकारी में करीब आठ लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका सामने आई है। हालांकि, बचाव अभियान पूरा होने से पहले यह स्पष्ट कहना मुश्किल है कि वास्तव में कितने लोग अंदर फंसे हैं।
रेस्क्यू टीम मलबे के अलग-अलग हिस्सों की जांच कर रही है। जरूरत के अनुसार भारी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि बचावकर्मी संभावित रूप से फंसे लोगों की आवाज या अन्य संकेतों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
इमारत में संचालित था लड़कों का PG
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसे वाली इमारत में लड़कों के रहने के लिए PG/हॉस्टल संचालित किया जा रहा था। यही वजह है कि इमारत गिरने के बाद अंदर मौजूद लोगों को लेकर चिंता और बढ़ गई।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के आधार पर कई लोगों के वहां मौजूद होने की बात कही जा रही है। हालांकि, प्रशासन की ओर से पूरी तरह सत्यापित आंकड़ा सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि हादसे के समय भवन में कितने लोग मौजूद थे।
स्थानीय लोगों ने भी बचाव में बढ़ाया हाथ
घटना के बाद आसपास रहने वाले लोग भी मौके पर पहुंच गए। शुरुआती दौर में स्थानीय लोगों ने मलबे के आसपास से लोगों को हटाने और बचाव टीमों को रास्ता उपलब्ध कराने में मदद की। बाद में पुलिस और दमकल विभाग ने स्थिति को व्यवस्थित किया, ताकि रेस्क्यू अभियान में किसी तरह की बाधा न आए।
मौके पर भीड़ को नियंत्रित करना भी बचाव दल के लिए एक चुनौती बना हुआ है। लोगों से घटनास्थल से दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है, ताकि राहतकर्मी बिना रुकावट अपना काम कर सकें।
बारिश के बीच राहत अभियान जारी
दिल्ली में रविवार को बारिश का दौर भी बना हुआ है। ऐसे मौसम में मलबे के बीच राहत अभियान चलाना बचावकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद टीमें लगातार संभावित लोगों की तलाश में जुटी हैं।
फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद ही हादसे में हुए नुकसान और प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या का आकलन किया जा सकेगा।
हादसे की वजह पर अभी तस्वीर साफ नहीं
तीन मंजिला इमारत अचानक किस वजह से गिरी, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। भवन की हालत, निर्माण से जुड़े पहलू और अन्य संभावित कारणों की जांच के बाद ही हादसे की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल किसी बड़े जानमाल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बचाव अभियान जारी है और प्रशासन की ओर से मिलने वाली अगली जानकारी के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सत्य निकेतन में हुए इस हादसे ने एक बार फिर घनी आबादी वाले इलाकों में भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी की निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि मलबे में फंसे लोगों को जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा।

