देहरादून ; 05.09.2026।
श्रीनगर। उत्तराखंड के श्रीनगर क्षेत्र से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। कीर्तिनगर ब्लॉक के मलेथा के समीप स्थित सिरोला गांव में मृत बकरी का मांस खाने के बाद दो दर्जन से अधिक लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बीमार लोगों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। कई मरीजों को उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया, जबकि गंभीर लक्षण वाले बच्चों को श्रीनगर के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बताया जा रहा है कि गांव में हाल ही में एक बकरी की मौत हो गई थी। इसके बाद कुछ ग्रामीणों ने उसके मांस को पकाकर भोजन के रूप में इस्तेमाल किया। मांस खाने के कुछ घंटे बाद ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। शुरुआत में उल्टी, दस्त और पेट में दर्द की शिकायत हुई, लेकिन कुछ लोगों में समस्या तेजी से बढ़ गई। बच्चों में डायरिया और शरीर में पानी की कमी के लक्षण अधिक गंभीर बताए जा रहे हैं।
एक साथ कई लोगों के बीमार पड़ने से मचा हड़कंप
एक ही समय में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होने की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। परिजन अपने-अपने स्तर पर मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों तक पहुंचाने में जुट गए। छोटे बच्चों की हालत को देखते हुए उन्हें श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, मांस खाने के बाद अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी शुरू हुई, जिसके बाद लोगों को समझ आया कि मामला गंभीर हो सकता है। इस घटना के बाद गांव में मृत पशु के मांस के सेवन को लेकर भी लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है।
डॉक्टर ने दी सख्त चेतावनी
चिकित्सक डॉ. अजय गोस्वामी ने इस घटना के मद्देनजर लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि किसी पशु की मौत बीमारी, संक्रमण या किसी संदिग्ध कारण से हुई हो तो उसके मांस का सेवन नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे मांस में हानिकारक सूक्ष्मजीव या विषैले तत्व मौजूद होने का खतरा रहता है, जो व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि केवल मांस को अच्छी तरह पकाना ही हर प्रकार के संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। इसलिए किसी मृत या संदिग्ध रूप से बीमार पशु का मांस इस्तेमाल करने से बचना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरा
चिकित्सकों के मुताबिक, दूषित भोजन के कारण होने वाली उल्टी और दस्त की स्थिति में बच्चों तथा बुजुर्गों के शरीर में पानी और जरूरी लवण तेजी से कम हो सकते हैं। यदि समय रहते इसकी भरपाई न की जाए तो डिहाइड्रेशन गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि मांस खाने के बाद यदि लगातार उल्टी-दस्त, पेट में तेज दर्द, बुखार, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर या पेशाब कम आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसे मरीजों को जल्द से जल्द चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए अस्पताल ले जाना चाहिए।
घटना के बाद गांव में बढ़ी सतर्कता
सिरोला गांव में एक साथ इतने लोगों के बीमार पड़ने की घटना ने खाद्य सुरक्षा और मृत पशु के मांस के सेवन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रभावित लोगों का उपचार जारी है। घटना के बाद ग्रामीणों में भी सावधानी बढ़ गई है और लोग स्वास्थ्य संबंधी किसी भी गंभीर लक्षण को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पशु की मौत का कारण स्पष्ट न होने की स्थिति में उसके मांस का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए बेहद जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे मामलों में सावधानी बरतना ही बीमारी और संभावित संक्रमण से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।

