देहरादून ; 05.09.2026।
नई दिल्ली/पौड़ी। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के दूरस्थ क्षेत्र नैनीडांडा स्थित राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुस्याखांद के प्रधानाध्यापक गबर सिंह बिष्ट के लिए शिक्षक दिवस का अवसर यादगार बन गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान-2026 से सम्मानित किया।
गबर सिंह बिष्ट ने सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ विद्यार्थियों को विज्ञान, गणित, तकनीक और विभिन्न प्रतियोगी गतिविधियों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए। उनके इन प्रयासों का असर विद्यालय के शैक्षणिक प्रदर्शन और विद्यार्थियों की उपलब्धियों में भी दिखाई दिया है।
कम छात्र संख्या वाले विद्यालय को बनाया उपलब्धियों का केंद्र
एक समय विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही थी। वर्ष 2019 के आसपास यहां छात्र संख्या करीब 16 तक पहुंच गई थी। बिष्ट ने इसे चुनौती मानते हुए अभिभावकों से संवाद बढ़ाया और विद्यालय में पढ़ाई के साथ विभिन्न रचनात्मक एवं शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया। धीरे-धीरे विद्यालय के प्रति अभिभावकों का विश्वास बढ़ा और छात्र संख्या करीब 40 तक पहुंच गई।
तकनीक के जरिए जारी रखी बच्चों की पढ़ाई
कोरोना काल में जब स्कूलों में नियमित कक्षाएं बंद थीं, तब भी उन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी। उन्होंने ऑनलाइन माध्यम और अपने यूट्यूब चैनल के जरिए बच्चों को पढ़ाने का प्रयास किया। विज्ञान और गणित जैसे विषयों को सरल तरीके से समझाने के लिए तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
विज्ञान और गणित में विद्यार्थियों ने लहराया परचम
प्रधानाध्यापक के मार्गदर्शन में विद्यालय के विद्यार्थियों ने विज्ञान और गणित की विभिन्न प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत आयोजित प्रतियोगिताओं में विद्यालय की टीम ने जिला स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। विद्यार्थियों ने गणित ओलंपियाड और छात्रवृत्ति परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
पिछले कुछ वर्षों में विद्यालय के कई विद्यार्थियों का विभिन्न छात्रवृत्ति परीक्षाओं में चयन हुआ है। इससे दूरस्थ क्षेत्र के बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह बढ़ा और अभिभावकों का सरकारी विद्यालय के प्रति भरोसा भी मजबूत हुआ।
पहले राज्य स्तर पर मिला सम्मान, अब राष्ट्रीय मंच पर पहचान
गबर सिंह बिष्ट के शैक्षिक योगदान को इससे पहले भी सम्मान मिल चुका है। उन्हें राज्य स्तर पर भी उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलना उनके वर्षों के समर्पण और नवाचारपूर्ण शिक्षण प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान माना जा रहा है।
पौड़ी के एक दूरस्थ पहाड़ी विद्यालय से निकलकर विज्ञान भवन के राष्ट्रीय मंच तक पहुंची यह उपलब्धि केवल गबर सिंह बिष्ट की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के उन शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायक संदेश है, जो विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किए जाने के साथ ही गबर सिंह बिष्ट ने यह साबित किया है कि संसाधनों की कमी प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बनती, यदि शिक्षक के भीतर बदलाव लाने का जुनून और बच्चों को आगे बढ़ाने का संकल्प हो।

