देहरादून ; 5 सितंबर 2026।
किसी बच्चे के हाथ में पहली बार कलम पकड़ाने से लेकर उसे अपने सपनों की उड़ान भरने का हौसला देने तक, एक शिक्षक की भूमिका केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होती। शिक्षक वह होता है जो अंकों से आगे बढ़कर जीवन का अर्थ समझाता है और असफलता के समय दोबारा प्रयास करने की हिम्मत देता है। इसी गुरु-शिष्य के रिश्ते को सम्मान देने के लिए हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
भारत में शिक्षक दिवस देश के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन स्वयं एक महान शिक्षक, दार्शनिक और विद्वान थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और शिक्षकों के प्रति उनके गहरे सम्मान के कारण उनकी जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।
कहा जाता है कि जब उनके कुछ विद्यार्थियों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तब डॉ. राधाकृष्णन ने व्यक्तिगत रूप से जन्मदिन मनाने के बजाय इस दिन को शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित करने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। यही वजह है कि यह दिन किसी एक व्यक्ति का जन्मदिन भर नहीं, बल्कि देशभर के उन लाखों शिक्षकों के सम्मान का प्रतीक बन गया, जो नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ने में जुटे हैं।
शिक्षक दिवस का महत्व आज के समय में और बढ़ गया है। बदलती तकनीक और डिजिटल शिक्षा के दौर में विद्यार्थियों के पास जानकारी के अनेक साधन उपलब्ध हैं, लेकिन सही जानकारी का चयन करना, उसे समझना और उसका सकारात्मक उपयोग करना शिक्षक ही सिखाता है। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थी को केवल सवालों के जवाब नहीं देता, बल्कि उसे सही सवाल पूछना भी सिखाता है।
इस दिन स्कूलों और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थी अपने शिक्षकों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं, शुभकामनाएं देते हैं और कई जगह एक दिन के लिए शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। लेकिन शिक्षक दिवस का वास्तविक अर्थ केवल फूल, कार्ड या उपहार देने तक सीमित नहीं है। किसी विद्यार्थी का अपने शिक्षक की सीख को जीवन में उतारना ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।
शिक्षक की कही हुई कोई छोटी-सी बात कई बार विद्यार्थी के पूरे जीवन की दिशा बदल देती है। इसलिए शिक्षक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि समाज में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, अधिकारी या कलाकार बनने से पहले हर व्यक्ति किसी न किसी शिक्षक का विद्यार्थी रहा है।
शिक्षक दिवस दरअसल उस रिश्ते का उत्सव है, जिसमें एक व्यक्ति ज्ञान देता है और दूसरा उस ज्ञान से अपना भविष्य बनाता है। यही गुरु-शिष्य परंपरा इस दिन को केवल एक तारीख नहीं, बल्कि सम्मान, कृतज्ञता और शिक्षा के महत्व का प्रतीक बनाती है।

