देहरादून ; 03.09.2026।
देहरादून। हरिद्वार में वर्ष 2027 में होने वाले अर्द्धकुंभ को लेकर तैयारियां अब केवल आयोजन की व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहेंगी। श्रद्धालुओं की भारी आमद के दौरान सामने आ सकने वाली आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए सरकार पहले से तैयारी मजबूत करने जा रही है। इसी क्रम में पूरे मेला क्षेत्र की जोखिम संबंधी तस्वीर तैयार कराई जाएगी, ताकि आयोजन के दौरान किसी चुनौती के सामने आने पर प्रशासन के पास तत्काल कार्रवाई का स्पष्ट विकल्प मौजूद हो।
इसके लिए एक विशेषज्ञ एजेंसी की मदद लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। एजेंसी का काम केवल संभावित दुर्घटनाओं की सूची तैयार करना नहीं होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की मौजूदा व्यवस्था को परखकर यह बताना होगा कि बड़ी भीड़ के बीच किस जगह पर कौन-सी परेशानी पैदा हो सकती है और उससे निपटने के लिए किस स्तर की तैयारी जरूरी होगी।
कहां बढ़ सकता है दबाव, होगा पूरा अध्ययन
अर्द्धकुंभ के दौरान घाटों, प्रमुख रास्तों और श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले क्षेत्रों में लगातार भीड़ बनी रहती है। ऐसे में कुछ स्थानों पर अचानक लोगों की संख्या बढ़ने से स्थिति जटिल हो सकती है। प्रस्तावित अध्ययन में ऐसे इलाकों की पहचान की जाएगी और उनकी क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।
प्रवेश और निकासी के रास्तों से लेकर लोगों के एकत्र होने वाले स्थानों तक की स्थिति देखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर भीड़ को दूसरी दिशा में भेजने के विकल्प, वैकल्पिक रास्ते और सुरक्षित निकासी की संभावनाएं भी तलाशने की योजना है।
आपात स्थिति में कितनी तेजी से मिलेगी मदद
किसी घटना के बाद राहत पहुंचाने में समय सबसे अहम होता है। इसलिए योजना तैयार करने वाली एजेंसी यह भी देखेगी कि दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में बचाव दल, स्वास्थ्य सेवाएं और अग्निशमन जैसी सुविधाएं कितनी जल्दी प्रभावित स्थान तक पहुंच सकती हैं।
मौजूदा संसाधनों की संख्या और उनकी वास्तविक उपयोगिता का आकलन भी किया जाएगा। जहां कमी सामने आएगी, वहां अतिरिक्त इंतजाम की जरूरत को रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है।
विभागों के बीच तालमेल पर भी रहेगा फोकस
अर्द्धकुंभ में एक साथ कई सरकारी एजेंसियां काम करेंगी। ऐसी स्थिति में किसी भी घटना के दौरान यदि सूचना एक विभाग से दूसरे तक पहुंचने में देरी हो, तो राहत अभियान प्रभावित हो सकता है। इसलिए प्रस्तावित आपदा प्रबंधन ढांचे में विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना तंत्र को भी जगह दी जाएगी।
पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, दमकल, बचाव दल और स्थानीय प्रशासन के बीच जिम्मेदारियां पहले से तय रखने की दिशा में भी सुझाव दिए जा सकते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर फैसले लेने में समय न गंवाना पड़े।
पुराने आयोजनों से अलग होगा स्थानीय जरूरतों पर जोर
देश में पहले हो चुके बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान अपनाए गए सुरक्षा मॉडल से भी सीख ली जाएगी, लेकिन हरिद्वार के लिए व्यवस्था स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। यहां घाटों, नदी क्षेत्र, शहर की सड़कों और मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही की अपनी अलग चुनौतियां हैं।
सरकार की कोशिश है कि अर्द्धकुंभ शुरू होने से काफी पहले संभावित कमियां सामने आ जाएं और उन्हें समय रहते दूर किया जा सके। यानी इस बार आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय खतरे की संभावना को पहले समझकर तैयारी करने पर जोर रहेगा।

