देहरादून ; 03.09.2026।
देहरादून। उत्तराखण्ड को विकास की नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नीति निर्माण को शोध, नवाचार और जमीनी जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया है। सचिवालय में उत्तराखण्ड स्टेट सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एण्ड गुड गवर्नेंस (USCPPGG) की शासी निकाय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य की नीतियां यहां की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि किसी भी नीति की सफलता केवल उसके निर्माण से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और परिणामों से तय होती है। इसलिए शोध एवं अध्ययन से सामने आने वाले निष्कर्षों को सरकारी योजनाओं और नीतियों में व्यावहारिक रूप से शामिल किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को ऐसी नीतियां तैयार करने पर जोर दिया, जिनका सीधा लाभ प्रदेश की जनता तक पहुंचे।
धामी ने सफल कार्यों की केस स्टडी तैयार करने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड में विभिन्न क्षेत्रों में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और उपलब्धियों को व्यवस्थित रूप से सामने लाने के लिए केस स्टडी तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में जिन योजनाओं और प्रयोगों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, उनका अध्ययन कर दूसरे क्षेत्रों में भी उन्हें लागू करने की संभावनाएं तलाशनी चाहिए।
धामी ने जनपद स्तर पर अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि अधिकारी बदलती परिस्थितियों और नई तकनीकों के अनुरूप बेहतर तरीके से काम कर सकें।
उत्तराखण्ड-2047 को लेकर धामी ने तय किया दीर्घकालिक विजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास की रणनीति केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। राज्य को विकसित उत्तराखण्ड-2047 की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए अभी से दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करना होगा।
इस रणनीति में आर्थिक विकास और रोजगार, मानव संसाधन एवं कल्याण, अवस्थापना विकास, वन एवं जैव विविधता, जलवायु अनुकूलन, स्थानीय स्वशासन, क्षेत्रीय विकास तथा तकनीक आधारित सुशासन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
धामी ने इस बात पर भी बल दिया कि विकास की योजनाएं उत्तराखण्ड की पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हों, ताकि प्रदेश के सभी हिस्सों में संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
युवाओं के शोध को मिलेगा प्रोत्साहन
बैठक में राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के प्रत्येक वर्ष 10 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को कैपस्टोन परियोजना के लिए स्टाइपेंड देने पर सहमति बनी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में की जा रही इस पहल का उद्देश्य युवाओं की शोध क्षमता को प्रदेश की प्राथमिकता वाले विषयों से जोड़ना है।
इससे विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध कार्यों को राज्य की वास्तविक समस्याओं और विकास की जरूरतों से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
MSME और स्थानीय रोजगार पर धामी सरकार का जोर
बैठक में राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हाई वैल्यू-लो वॉल्यूम उत्पादों को बढ़ावा देने और MSME क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया गया। मुख्यमंत्री ने ऐसे सुझावों के परीक्षण और उपयोगी प्रस्तावों पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
पर्वतीय क्षेत्रों में होम टूरिज्म को बढ़ावा देने के सुझाव को भी महत्वपूर्ण माना गया। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलने के साथ गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावनाएं हैं।
योजनाओं की मॉनिटरिंग और नीतियों की समीक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री धामी ने योजनाओं की प्रगति पर केवल औपचारिक निगरानी के बजाय उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने की जरूरत बताई। बैठक में वार्षिक मॉनिटरिंग लक्ष्य तय करने, योजनाओं का नियमित मूल्यांकन करने और समय-समय पर नीतियों का परीक्षण करने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी नीति या योजना से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं तो उसमें आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए। इस तरह नीति निर्माण को एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
SDG के क्षेत्र में उत्तराखण्ड की उपलब्धि पर चर्चा
बैठक में USCPPGG और UNDP के सहयोग से सतत विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन को लेकर किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। SDG के स्थानीयकरण, मॉनिटरिंग और नीति मूल्यांकन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि SDG के क्षेत्र में उत्तराखण्ड हिमालयी राज्यों में प्रथम स्थान पर है।
धामी ने कहा- सुझावों को जमीन पर उतारना प्राथमिकता
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने शासी निकाय के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों का परीक्षण कर उपयोगी सुझावों पर ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास को गति देने के लिए सरकार को शोध आधारित नीति निर्माण, नवाचार, प्रशासनिक क्षमता विकास और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर लगातार काम करना होगा।
इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘Uttarakhand at 25: A Himalayan State with Infinite Possibilities’ पुस्तक का विमोचन भी किया। पुस्तक में राज्य के गठन से लेकर 25 वर्षों की विकास यात्रा को समाहित किया गया है।
कुल मिलाकर बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखण्ड के लिए ऐसी विकास व्यवस्था पर जोर दिया, जिसमें शोध से नीति बने, नीति का प्रभाव जमीन पर दिखाई दे और उसकी नियमित समीक्षा के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाए। विकसित उत्तराखण्ड-2047 के लक्ष्य को इसी दीर्घकालिक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।

