देहरादून ; 02.09.2026।
देहरादून: उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता को लेकर धामी सरकार ने अब अपना रुख और स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि प्रदेश में संचालित ऐसे मदरसे, जो निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता हासिल नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में कैबिनेट मंत्री खजान दास ने सरकार की नीति को लेकर विस्तार से जानकारी दी।
सरकार का कहना है कि प्रदेश में चल रहे मदरसों को अब शिक्षा व्यवस्था से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। इसके लिए उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड की व्यवस्था को समाप्त कर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है। नई व्यवस्था के तहत मदरसों को प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी।
मान्यता के बिना संचालन पर सख्ती
सरकार की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मदरसों में पढ़ाई की व्यवस्था को निर्धारित शैक्षणिक ढांचे से जोड़ना बताया जा रहा है। मान्यता प्राप्त करने वाले संस्थानों में राज्य शिक्षा बोर्ड से संबंधित पाठ्यक्रम लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं, जो संस्थान सरकार की तय व्यवस्था के तहत मान्यता लेने से बचेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाएगा।
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने साफ किया कि सरकार नियमों के पालन को लेकर किसी तरह की ढिलाई के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन निर्धारित मानकों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।
नई व्यवस्था में प्राधिकरण की अहम भूमिका
मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के बाद गठित अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को इस पूरी व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। अब मदरसों की मान्यता, शिक्षा से जुड़े मानकों और निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुपालन की प्रक्रिया इसी नए ढांचे के तहत आगे बढ़ाई जाएगी।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और एकरूपता बनाए रखने के लिए संस्थानों का नियमों के दायरे में रहना जरूरी है। इसी आधार पर बिना मान्यता संचालित होने वाले मदरसों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सरकार के फैसले से बढ़ी हलचल
मदरसों से जुड़ी इस नई व्यवस्था के बाद प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सरकार के सख्त रुख के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि कितने मदरसे नई व्यवस्था के तहत मान्यता के लिए आगे आते हैं और किन संस्थानों पर नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल धामी सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि उत्तराखंड में मदरसों का संचालन अब तय नियमों और मान्यता की प्रक्रिया के तहत ही स्वीकार किया जाएगा। मान्यता से बाहर रहकर संस्थान चलाने वालों के खिलाफ आगे कानूनी कदम उठाए जाने की तैयारी है।

