देहरादून ; 02.09.2026।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच भारत लगातार राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है। संकट की इस घड़ी में भारत की ओर से भेजी जा रही राहत सामग्री के साथ विशेषज्ञ टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुधवार को संसद में भारत की सहायता के लिए आभार जताते हुए कहा कि मुश्किल समय में पड़ोसी देश से समय पर मदद मिली।
भारत ने भेजी राहत सामग्री की पांचवीं खेप
आपदा प्रभावित नेपाल के लिए भारत ने राहत सामग्री की पांचवीं खेप भेजी है। लगातार भेजी जा रही इन खेपों का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान जल्द पहुंचाना है। दुर्गम इलाकों में राहत पहुंचाना इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, ऐसे में भारतीय सहायता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरंगों में तलाश कर रही भारतीय टीमें
भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। भारतीय विशेषज्ञ और बचाव दल नेपाल में जारी सर्च ऑपरेशन में भी सहयोग कर रहे हैं। विशेष रूप से सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और मलबे में दबे शवों को निकालने के काम में भारतीय टीमें मदद कर रही हैं।
बचाव अभियान के दौरान बरामद शवों की पहचान में भी तकनीकी सहायता दी जा रही है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण यह काम बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
लापता लोगों की संख्या ने बढ़ाई चिंता
नेपाल और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारियों का भी पता नहीं चल पाया है। आशंका है कि कुछ लोग परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे हो सकते हैं।
ऐसे हालात में भारतीय बचाव विशेषज्ञों की तकनीकी मदद नेपाल के लिए अहम साबित हो रही है। सुरंगों और दुर्गम इलाकों में तलाशी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बालेन शाह ने भारत की मदद को सराहा
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में भारत और चीन दोनों की सहायता का जिक्र किया, लेकिन भारत की ओर से भेजी जा रही लगातार राहत और बचाव सहायता नेपाल में चल रहे अभियान का अहम हिस्सा बनी हुई है।
भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने और विशेषज्ञ दलों की तैनाती से यह संकेत भी मिलता है कि दोनों देशों के बीच आपदा के समय सहयोग का तंत्र तेजी से सक्रिय हो रहा है। फिलहाल भारतीय टीमें नेपाल में राहत और खोज अभियान में अपना योगदान जारी रखे हुए हैं।

