देहरादून ; 28.08.2026,
चम्पावत। जनपद चम्पावत के देवीधुरा स्थित प्रसिद्ध मां वाराही धाम में रक्षाबंधन के अवसर पर ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। सदियों पुरानी इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक देवीधुरा पहुंचे। पूरा क्षेत्र मां वाराही के जयकारों, शंखनाद और पारंपरिक लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। आस्था के साथ लोक परंपरा और सामुदायिक सहभागिता का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने मेले की ऐतिहासिक पहचान को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
मेले में शामिल होने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक छोलिया नृत्य की प्रस्तुति देकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।
देवीधुरा पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने मां वाराही देवी के मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां वाराही की कृपा सभी लोगों पर बनी रहे और प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।
चार खाम और सात थोक की परंपरा बनी आकर्षण का केंद्र
बग्वाल मेले का सबसे प्रमुख आकर्षण चार खामों के बीच होने वाली पारंपरिक बग्वाल रही। वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया खाम के बग्वालिये निर्धारित परंपरागत रंगों की पोशाक और पगड़ी पहनकर मैदान में पहुंचे। उनके हाथों में बांस और रिंगाल से तैयार पारंपरिक ढालें थीं।
प्रधान पुजारी की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के बाद बग्वाल की शुरुआत हुई। शंखनाद के साथ जैसे ही बग्वालिये मैदान में उतरे, वातावरण मां वाराही के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के बीच इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया।
इस बार बग्वाल दोपहर 1 बजकर 48 मिनट पर शुरू हुई और 1 बजकर 55 मिनट पर समाप्त हुई। करीब आठ मिनट तक चले इस आयोजन में पत्थरों के स्थान पर फल और फूलों का इस्तेमाल किया गया। इससे सदियों पुरानी परंपरा को निभाने के साथ सुरक्षा और सांस्कृतिक स्वरूप के बीच संतुलन भी देखने को मिला।
पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी ने बताया कि फल और फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को शुभ माना जाता है। उनके अनुसार, खामों के आगमन और बग्वाल के पारंपरिक संचालन की जिम्मेदारी भी पीठाचार्य द्वारा निभाई जाती है।
मैदान में बरसे फल-फूल, गूंजता रहा जयघोष
बग्वाल के दौरान मैदान में फल और फूलों की बरसात होती रही। चारों ओर से उठते मां वाराही के जयकारों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे बग्वालियों और ढालों के साथ मैदान में उतरने की तस्वीरें मेले की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती रहीं।
इस आयोजन की एक खास विशेषता यह भी रही कि बग्वाल समाप्त होने के बाद प्रतिभागी आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश देते हुए एक-दूसरे से गले मिलते हैं। मुख्यमंत्री धामी ने भी इस परंपरा को अनुशासन और सामाजिक एकता की मिसाल बताया।
देवीधुरा के विकास को लेकर CM धामी ने गिनाईं योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवीधुरा का बग्वाल मेला उत्तराखंड की धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास कार्यों के साथ प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने पर भी जोर दे रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत कुमाऊं के प्रमुख धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में करीब 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन और 4.57 करोड़ रुपये से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण के कार्य चल रहे हैं।
इसके अलावा घटोत्कच मंदिर के सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर के निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट और लधौनधुरा मेला स्थल के सौंदर्यीकरण जैसे कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
देवीधुरा और आसपास के धार्मिक स्थलों से जुड़ी अन्य योजनाओं की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर करीब 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 4.70 करोड़ रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर करीब 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना पर काम किया जा रहा है। पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर और डुंगरी-फत्याल शिव मंदिर से संबंधित विकास कार्य भी जारी हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के क्षेत्र में 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।
नगर पंचायत और मल्टी लेवल पार्किंग की घोषणा
मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात भी कही। इसके साथ ही उन्होंने देवीधुरा में करीब 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग बनाने की योजना जल्द शुरू कराने की बात कही। इससे धार्मिक आयोजनों और मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को पार्किंग की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने से इसकी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने का अवसर मिला है। सरकार का प्रयास है कि धार्मिक पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलें और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति मिले।
रक्षाबंधन पर महिलाओं और बच्चियों ने बांधी राखी
मेले के दौरान रक्षाबंधन पर्व की भी विशेष झलक देखने को मिली। बच्चियों और महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने भी सभी को रक्षाबंधन की बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवीधुरा की बग्वाल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की विशिष्ट लोक परंपरा और सामाजिक सौहार्द की पहचान है। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक आयोजनों से जुड़ने का आह्वान किया।
देवीधुरा का बग्वाल मेला एक बार फिर यह संदेश देता नजर आया कि आधुनिक विकास के साथ अपनी जड़ों और विरासत को सहेजना भी उतना ही जरूरी है। मां वाराही धाम में उमड़ा जनसैलाब, छोलिया की थाप, शंखनाद और बग्वाल मैदान में गूंजते जयकारे इस ऐतिहासिक मेले की जीवंत परंपरा के गवाह बने।

