देहरादून ; 27.08.2026,
काठमांडू। नेपाल में भोटेकोशी नदी के अचानक उफान ने बुधवार को ऐसी तबाही मचाई, जिसने पूरे हिमालयी क्षेत्र को झकझोर दिया। नेपाल-चीन सीमा के आसपास शुरू हुई तेज बाढ़ देखते ही देखते नदी के निचले इलाकों तक फैल गई। पानी और मलबे की तेज धारा अपने साथ घर, वाहन, पुल और दूसरी संरचनाएं बहा ले गई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक आपदा में मृतकों की संख्या 359 से अधिक हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
अचानक आई बाढ़ ने संभलने तक का मौका नहीं दिया
बाढ़ इतनी तेजी से आई कि प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। रासुवा समेत आसपास के इलाकों में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और देखते ही देखते कई बस्तियां मलबे और पानी की चपेट में आ गईं। बचाव दल अब नदी के किनारों, मलबे और निचले इलाकों में लापता लोगों को तलाश रहे हैं।
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार इस आपदा से कई जिले प्रभावित हुए हैं। महत्वपूर्ण सड़क संपर्क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण कई इलाकों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बन गया है।
विदेशी पर्यटकों की बड़ी संख्या भी प्रभावित
इस हादसे में स्थानीय लोगों के साथ विदेशी पर्यटकों और सुरक्षाकर्मियों के भी लापता होने की खबर है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार सैकड़ों पर्यटक अभी संपर्क से बाहर हैं, जिनमें भारतीय नागरिकों की संख्या भी काफी है। अलग-अलग सरकारी सूचियों में आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं, इसलिए लापता लोगों की वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट रूप से तय नहीं हो सकी है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े यात्रियों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इस वजह से नेपाल और भारत दोनों में कई परिवार अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
ग्लेशियर और मलबे से बनी बाढ़ पर जांच
प्रारंभिक जानकारी में बाढ़ के पीछे सामान्य बारिश के बजाय हिमालयी क्षेत्र में हुए बड़े भू-स्खलन, बर्फ-पत्थर के मलबे या ग्लेशियर से जुड़ी घटना की आशंका जताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक ल्हेंदे क्षेत्र में अचानक पानी का दबाव बढ़ा, जिसके बाद भोटेकोशी नदी में विनाशकारी बहाव आया। हालांकि आपदा की सटीक वजह और घटनाक्रम को लेकर विशेषज्ञों तथा अधिकारियों की जांच जारी है।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं और संपर्क व्यवस्था पर भी असर
बाढ़ ने सिर्फ आबादी वाले क्षेत्रों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि नेपाल के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी भारी चोट पहुंचाई है। कई पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं तथा कई जलविद्युत परियोजनाओं का संचालन प्रभावित हुआ है। सीमा से जुड़े व्यापारिक मार्गों पर भी इसका असर पड़ा है, जिससे राहत और बचाव के साथ-साथ सामान्य आवाजाही बहाल करना बड़ी चुनौती बन गया है।
युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान
नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और बचाव टीमों को तैनात किया है। हेलीकॉप्टरों की मदद से उन स्थानों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जहां सड़क और पुल टूटने के कारण जमीनी संपर्क मुश्किल हो गया है। नदी के बहाव वाले इलाकों में शवों और लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।
भारत ने भी बढ़ाया सहायता का हाथ
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद भारत ने मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की है। राहत सामग्री के साथ दवाइयों, जरूरी सामान और आपदा प्रबंधन से जुड़ी मदद भेजी गई है। भारत की ओर से प्रभावित लोगों के साथ-साथ नेपाल में फंसे या लापता भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भी समन्वय किया जा रहा है।
भोटेकोशी की यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के बढ़ते खतरे की गंभीर तस्वीर पेश करती है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे और नदी किनारे फंसे लोगों तक पहुंचना तथा लापता लोगों का पता लगाना है। जैसे-जैसे बचाव अभियान आगे बढ़ेगा, नुकसान और हताहतों की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

