देहरादून ; 26.08.2026।
देहरादून। उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए हुए आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए राज्य सरकार ने अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने शहीद राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को दी जाने वाली मासिक पेंशन में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। अब पात्र आश्रितों को ₹3,000 के बजाय ₹5,500 प्रतिमाह पेंशन मिलेगी।
सरकार के इस निर्णय से शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों को पहले की तुलना में हर महीने ₹2,500 अधिक आर्थिक सहायता प्राप्त होगी। राज्य गठन के आंदोलन में जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खोया, उनके लिए यह बढ़ोतरी आर्थिक मदद के साथ-साथ सम्मान और सरकार की जिम्मेदारी के संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है।
आंदोलनकारियों की अन्य श्रेणियों को भी बढ़ा लाभ
राज्य सरकार ने केवल शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन में ही वृद्धि नहीं की है। आंदोलन के दौरान सात दिन तक जेल में रहे या घायल हुए आंदोलनकारियों की मासिक पेंशन ₹6,000 से बढ़ाकर ₹7,000 की गई है। वहीं, आंदोलन के दौरान पूरी तरह दिव्यांग होकर शय्याग्रस्त हुए आंदोलनकारियों की पेंशन ₹20,000 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह करने का निर्णय लिया गया है। अन्य श्रेणी के चिन्हित आंदोलनकारियों की पेंशन भी ₹4,500 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रतिमाह की गई है।
बलिदान को सम्मान देने की सरकार की कोशिश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार के फैसले को राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान के प्रति कृतज्ञता से जोड़ते हुए कहा है कि उत्तराखंड के निर्माण में आंदोलनकारियों का योगदान भुलाया नहीं जा सकता। सरकार का उद्देश्य उनके परिवारों को सम्मान देने के साथ आर्थिक रूप से भी सहारा उपलब्ध कराना है।
राज्य सरकार पहले से ही आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार ने शहीद आंदोलनकारियों की स्मृति को बनाए रखने के लिए उनके क्षेत्रों की प्रमुख अवस्थापना सुविधाओं के नामकरण और शहीद स्मारकों के सौंदर्यीकरण जैसी घोषणाएं भी की हैं।
परिवारों को बढ़ेगा आर्थिक सहारा
पेंशन में ₹2,500 की मासिक वृद्धि भले ही राशि के लिहाज से सीमित दिखाई दे, लेकिन नियमित आर्थिक सहायता के रूप में यह शहीद आंदोलनकारियों के आश्रित परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। सरकार का यह कदम उत्तराखंड आंदोलन के दौरान हुए बलिदानों को संस्थागत रूप से सम्मान देने की दिशा में एक और पहल माना जा रहा है।
राज्य सरकार का कहना है कि उत्तराखंड को अलग पहचान दिलाने वाले आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के हितों को प्राथमिकता देना उसकी जिम्मेदारी है। पेंशन में यह बढ़ोतरी इसी सोच के तहत की गई है और इससे शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों को आगे भी आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है।

