देहरादून ; 26.08.2026।
देहरादून। उत्तराखंड में पशुओं के बीच तेजी से फैलने वाले लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) को लेकर सरकार ने एहतियाती कदम और कड़े कर दिए हैं। संक्रमण को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचने से रोकने के लिए प्रदेश में गाय और भैंस के अंतरराज्यीय तथा अंतरजनपदीय परिवहन पर रोक लगा दी गई है। यानी अब दूसरे राज्यों से उत्तराखंड या प्रदेश के किसी एक जिले से दूसरे जिले में गाय-भैंस को ले जाने पर अनुमति नहीं होगी।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य संक्रमित पशुओं के संपर्क और आवाजाही के माध्यम से बीमारी के प्रसार की आशंका को कम करना है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में गोवंशीय पशुओं में लंपी रोग जैसे लक्षण सामने आने के बाद पशुपालन विभाग को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
16 हजार निराश्रित गोवंश पर भी नजर
एलएसडी से बचाव की रणनीति में सड़कों और खुले क्षेत्रों में घूम रहे करीब 16 हजार निराश्रित गोवंशीय पशुओं को भी शामिल किया गया है। इन पशुओं को संक्रमण के खतरे से बचाने और उनकी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के 102 गोसदनों को क्वारंटीन सेंटर के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है।
इस व्यवस्था के तहत जरूरत के अनुसार निराश्रित पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखा जा सकेगा, जिससे संक्रमित और स्वस्थ पशुओं के बीच अनावश्यक संपर्क को कम किया जा सके।
जिलों में सक्रिय हुई पशुपालन विभाग की टीमें
रोग की स्थिति पर नजर रखने के लिए पशुपालन विभाग की टीमें विभिन्न जिलों में सक्रिय कर दी गई हैं। पशुपालकों को बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विभाग को सूचना देने और प्रभावित पशु को अन्य पशुओं से अलग रखने की सलाह दी जा रही है।
सरकार की ओर से एलएसडी की रोकथाम को लेकर एडवाइजरी भी जारी की गई है। इसके अलावा पशुपालन निदेशालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से बीमारी से जुड़ी सूचनाओं की निगरानी और जिलों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
संक्रमण रोकने पर जोर
लंपी रोग मुख्य रूप से गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करता है और इसके चलते पशुओं के शरीर पर गांठें, बुखार तथा अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में सरकार का जोर बीमारी के शुरुआती स्तर पर पहचान, संक्रमित पशुओं को अलग रखने और पशुओं की अनावश्यक आवाजाही रोकने पर है।
गाय-भैंस के परिवहन पर लगाया गया प्रतिबंध फिलहाल संक्रमण को सीमित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभागीय स्तर पर निगरानी बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में जिलों की स्थिति के आधार पर आगे के कदम भी उठाए जा सकते हैं।

