7 july 2026
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए अग्निवीरों के पहले बैच का चार साल का कार्यकाल इस वर्ष पूरा होने जा रहा है। इसी बीच तीनों सेनाओं में अग्निवीरों के स्थायी समायोजन (रिटेंशन) की संख्या बढ़ाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल नीति के अनुसार केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रावधान है, लेकिन सेना के भीतर इस सीमा को बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना अपने यहां लगभग 75 प्रतिशत तक अग्निवीरों को बनाए रखने का प्रस्ताव रख सकती है, जबकि भारतीय सेना और वायुसेना मौजूदा 25 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर करीब 50 प्रतिशत करने की मांग कर सकती हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।
रक्षा अधिकारियों का मानना है कि पिछले चार वर्षों में प्रशिक्षित हुए अग्निवीरों ने आधुनिक हथियारों, नई तकनीकों और विभिन्न सैन्य अभियानों का अनुभव हासिल किया है। ऐसे में अनुभवी जवानों को सेवा में बनाए रखने से सेनाओं की कार्यक्षमता और संचालन क्षमता मजबूत हो सकती है।
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग (DMA) और तीनों सेनाओं के बीच आगे भी चर्चा होगी। यदि कुल रिटेंशन प्रतिशत में बदलाव नहीं होता है, तब भी कुछ विशेष यूनिटों में अनुभवी अग्निवीरों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रखी जा सकती है, जबकि अन्य इकाइयों में वर्तमान बैच के जवानों को शामिल किया जा सकता है।
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती और प्रशिक्षण का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। पिछले प्रशिक्षण चक्र में भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंटल केंद्रों में करीब 70 हजार अग्निवीरों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। आने वाले प्रशिक्षण वर्ष में लगभग 90 हजार रिक्तियों पर भर्ती की संभावना जताई जा रही है।
सेना का लक्ष्य अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से भर्ती बढ़ाकर जवानों की कमी को दूर करना है। इसके साथ ही अग्निवीरों के लिए बैंकिंग सुविधाओं, वित्तीय योजनाओं और अन्य लाभों को लेकर भी कई समझौते किए जा चुके हैं। छुट्टी और अन्य कई भत्तों के मामले में भी उन्हें नियमित सैनिकों के समान सुविधाएं दी जा रही हैं।
फिलहाल अग्निवीरों के स्थायी समायोजन की सीमा बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रक्षा प्रतिष्ठान के भीतर इस विषय पर विचार-विमर्श जारी है। आने वाले समय में सरकार और सैन्य नेतृत्व की बैठक के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

