17 june 2026
नई दिल्ली रक्षा क्षेत्र के पूर्व ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) से जुड़े लगभग 62,000 सिविलियन कर्मचारियों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कर्मचारी 2021 में हुए कॉर्पोरेटाइजेशन के बाद बनी सात नई डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट्स (DPSUs) में स्थायी रूप से शामिल नहीं होना चाहते, वे अपनी सेवा समाप्ति यानी रिटायरमेंट तक ‘डीम्ड डेप्युटेशन’ की स्थिति में ही बने रहेंगे।
यह निर्णय ‘एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ की मंजूरी के बाद लागू किया गया है और इसे कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
कॉर्पोरेटाइजेशन के बाद बनी थी असमंजस की स्थिति
1 अक्टूबर 2021 को सरकार ने 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों को पुनर्गठित कर सात अलग-अलग डिफेंस कंपनियों में बदल दिया था। इसके बाद कर्मचारियों की स्थिति को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ था कि वे केंद्र सरकार के कर्मचारी रहेंगे या नई कंपनियों के तहत आ जाएंगे।
तब से ये सभी कर्मचारी ‘डीम्ड डेप्युटेशन’ पर कार्य कर रहे थे, लेकिन इस व्यवस्था को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्पष्टता नहीं थी। नए आदेश के बाद अब यह स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है।
कर्मचारियों को मिलेगा विकल्प, दबाव नहीं होगा
रक्षा मंत्रालय के ताजा आदेश के अनुसार, सभी योग्य कर्मचारियों को एक समान ‘एब्जॉर्प्शन पैकेज’ दिया जाएगा। इसका मतलब है कि वे चाहें तो नई कंपनियों में स्थायी रूप से शामिल हो सकते हैं, या फिर केंद्र सरकार के कर्मचारी के रूप में ही बने रह सकते हैं।
सबसे अहम बात यह है कि जो कर्मचारी एब्जॉर्प्शन नहीं चुनेंगे, उन्हें रिटायरमेंट तक जबरन स्थानांतरण या समावेशन के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
सेवा शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि डीम्ड डेप्युटेशन पर रहने वाले कर्मचारियों पर केंद्र सरकार की सभी सेवा शर्तें लागू रहेंगी। इसमें वेतन संरचना, भत्ते, मेडिकल सुविधाएं, छुट्टियां, पेंशन लाभ और पदोन्नति जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इससे कर्मचारियों को यह भरोसा मिला है कि कॉर्पोरेटाइजेशन के बावजूद उनकी नौकरी की सुरक्षा और अधिकारों में कोई कमी नहीं आएगी।
कर्मचारी संगठनों ने बताया बड़ी जीत
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (AIDEF) समेत कई कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले को अपनी लंबे समय से चल रही मांग की जीत बताया है। संगठनों का कहना है कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी कर्मचारी को केंद्र सरकार के कर्मचारी का दर्जा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
कर्मचारी प्रतिनिधियों के अनुसार, यह फैसला न केवल मौजूदा कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि भविष्य की अनिश्चितताओं को भी काफी हद तक समाप्त करता है।
आगे भी जारी रह सकती हैं मांगें
हालांकि इस फैसले का स्वागत किया गया है, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने कुछ अन्य मांगें भी उठाई हैं, जिनमें मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने जैसे मुद्दे शामिल हैं। संगठनों का कहना है कि उनकी कानूनी और संगठनात्मक लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
निष्कर्ष
सरकार के इस फैसले से रक्षा उत्पादन क्षेत्र के हजारों कर्मचारियों को स्थिरता और सुरक्षा का एहसास मिला है। लंबे समय से चले आ रहे भ्रम और असंतोष के बीच यह निर्णय एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है, जो नई रक्षा कंपनियों और कर्मचारियों दोनों के लिए कामकाज को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाएगा।

