14 june 2026
रुद्रपुर। वर्षों से नजूल भूमि पर बसे हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर सामने आ रही है। रुद्रपुर में करीब 20 हजार से अधिक परिवार लंबे समय से मालिकाना हक की मांग कर रहे हैं। अब इस दिशा में तेज़ी से प्रयास होते दिखाई दे रहे हैं, जिससे लोगों की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं।
विधानसभा चुनावों से पहले इस मुद्दे ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक महत्व हासिल कर लिया है। शहर विधायक शिव अरोरा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर नजूल भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना अधिकार दिलाने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में सकारात्मक पहल और कानूनी स्तर पर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है।
हाईकोर्ट स्तर पर भी बढ़ी सक्रियता
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद विधायक शिव अरोरा ने हाईकोर्ट में एडवोकेट जनरल एस.एन. बदुलकर तथा मुख्य स्थायी अधिवक्ता पूरन सिंह बिष्ट से भी चर्चा की। इस दौरान नजूल भूमि से जुड़े कानूनी पहलुओं और संभावित समाधान पर विचार-विमर्श किया गया। माना जा रहा है कि सरकार इस मामले में न्यायालय के समक्ष मजबूत पक्ष रखने की तैयारी कर रही है।
पुराना सपना हो सकता है साकार
विधायक शिव अरोरा का कहना है कि राजनीति में आने से पहले ही उन्होंने नजूल भूमि पर निवास कर रहे परिवारों को मालिकाना हक दिलाने का संकल्प लिया था। विधायक बनने के बाद से वह लगातार इस मुद्दे को सरकार और प्रशासन के सामने उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कानूनी बाधाएं दूर होती हैं तो हजारों परिवारों को स्थायी राहत मिल सकेगी।
लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं लोग
रुद्रपुर में कई ऐसे परिवार हैं जो दशकों से नजूल भूमि पर रह रहे हैं। उनके पास मकान तो हैं, लेकिन भूमि का मालिकाना अधिकार नहीं होने के कारण उन्हें कई प्रशासनिक और वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मालिकाना हक मिलने से न केवल उनकी संपत्ति सुरक्षित होगी, बल्कि बैंक ऋण, नक्शा पास कराने और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ लेना भी आसान हो जाएगा।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल नजूल भूमि का मुद्दा कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में रुद्रपुर के हजारों परिवारों की निगाहें राज्य सरकार और न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। यदि इस दिशा में सकारात्मक निर्णय आता है तो यह शहर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है और हजारों परिवारों के वर्षों पुराने सपने को नई उड़ान मिल सकती है।

