14 june 2026
ऋषिकेश। उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉडगेज रेल परियोजना को अब विद्युत आपूर्ति के क्षेत्र में बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। परियोजना के लिए आवश्यक बिजली उपलब्ध कराने हेतु पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) द्वारा शैल विहार क्षेत्र में निर्मित नया बिजलीघर पूरी तरह तैयार हो चुका है। करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से बने इस बिजलीघर को जल्द ही परीक्षण प्रक्रिया से गुजारा जाएगा, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से संचालन में लाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार, बिजलीघर में स्थापित ट्रांसफार्मरों की चार्जिंग प्रक्रिया इस महीने के अंतिम सप्ताह से शुरू होने वाली है। तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों की जांच पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि बिजलीघर का संचालन पिटकुल अपने स्तर पर करेगा या फिर इसे रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को हस्तांतरित किया जाएगा।
इस विद्युत उपकेंद्र का निर्माण कार्य लगभग छह महीने पहले शुरू किया गया था। निर्धारित समय के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है, जो परियोजना की प्रगति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। बिजलीघर में 400 केवीए क्षमता के दो स्टेशन सर्विस ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं, जो रेलवे परियोजना की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
132 केवी लाइन से मिलेगी निर्बाध बिजली
नए बिजलीघर को ऋषिकेश-श्रीनगर 132 केवी पारेषण लाइन से जोड़ा गया है। इसी लाइन के माध्यम से यहां विद्युत आपूर्ति पहुंचेगी। अधिकारियों का कहना है कि ट्रांसफार्मरों को चार्ज करने और सभी तकनीकी परीक्षणों की प्रक्रिया महीने के अंत तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को नियमित रूप से संचालित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिजलीघर भविष्य में रेल परियोजना के संचालन के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ विश्वसनीय विद्युत व्यवस्था सबसे बड़ी आवश्यकता होती है और यह उपकेंद्र उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आरवीएनएल बनाएगा अलग ट्रैक्शन बिजलीघर
पिटकुल द्वारा तैयार किए गए बिजलीघर के अलावा रेल विकास निगम लिमिटेड भी परियोजना के लिए एक अलग ट्रैक्शन उपकेंद्र स्थापित करेगा। यह 33/25 केवी क्षमता का विशेष बिजलीघर होगा, जिसका उपयोग सीधे ट्रेनों के संचालन के लिए किया जाएगा। रेलवे की इलेक्ट्रिक ट्रेनों को 25 केवी ओवरहेड लाइन के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके साथ ही आरवीएनएल अपने प्रशासनिक कार्यालयों, तकनीकी भवनों और कर्मचारियों की आवासीय कॉलोनियों को भी इसी विद्युत व्यवस्था से जोड़ने की योजना बना रहा है। इससे परियोजना क्षेत्र में बिजली प्रबंधन अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगा।
रेल परियोजना की प्रगति को मिलेगा नया आयाम
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड के विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस रेल लाइन के शुरू होने से पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए आवागमन पहले की तुलना में अधिक आसान और सुरक्षित हो जाएगा।
नए बिजलीघर के तैयार होने से परियोजना के विद्युत ढांचे को मजबूती मिली है। अधिकारियों का मानना है कि आगामी चरणों में रेल संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी तेजी से पूरा किया जाएगा, जिससे भविष्य में ट्रेन संचालन के दौरान किसी प्रकार की विद्युत बाधा का सामना न करना पड़े।
क्षेत्रीय विकास को भी मिलेगा लाभ
बिजलीघर के निर्माण से केवल रेल परियोजना ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास को भी गति मिलेगी। आधुनिक विद्युत सुविधाओं के कारण भविष्य में रेलवे से जुड़े अन्य विकास कार्यों को भी बेहतर समर्थन मिलेगा। राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के साथ विकसित हो रही विद्युत और परिवहन सुविधाएं आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

