21 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। दून-सहारनपुर सीमा पर स्थित श्री मां डाट काली मनोकामना सिद्धपीठ मंगलवार को अपनी स्थापना के 223 वर्ष पूर्ण होने पर वार्षिकोत्सव की भव्य तैयारियों में सजा हुआ है। सदियों पुराना यह शक्तिधाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के विश्वास का ऐसा प्रतीक है, जहां हर मनोकामना लेकर आने वाला भक्त माता के चरणों में शीश नवाता है। मंदिर में दो दिवसीय धार्मिक आयोजन के तहत विशेष पूजा-अर्चना, ध्वजारोहण, हवन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
मंदिर के मुख्य सेवादार गौरव कुमार ने बताया कि 21 जुलाई, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मंदिर का 223वां वार्षिकोत्सव मनाया जाएगा। वहीं 22 जुलाई को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन होगा। इस अवसर पर पांच पवित्र ध्वज श्री मां डाट काली मनोकामना सिद्धपीठ, मां भद्रकाली मंदिर, हनुमान मंदिर तथा झंडा बाजार स्थित शाकुंभरी मंदिर सहित निर्धारित स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार ध्वजारोहण शक्ति, संरक्षण और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
सुरंग निर्माण से जुड़ी है चमत्कारिक कथा
मां डाट काली मंदिर का इतिहास अंग्रेजी शासनकाल से जुड़ा हुआ है। जनश्रुति के अनुसार, जब इस क्षेत्र में सुरंग का निर्माण कराया जा रहा था, तब बार-बार निर्माण कार्य किसी न किसी बाधा के कारण रुक जाता था। काफी प्रयासों के बाद भी सफलता नहीं मिली। इसी दौरान निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे एक अंग्रेज इंजीनियर को सपने में मां काली के दर्शन हुए। मां ने उस स्थान का संकेत दिया जहां उनकी प्रतिमा धरती के भीतर विराजमान थी। अगले दिन खुदाई कराई गई तो वहां से मां की दिव्य प्रतिमा निकली। प्रतिमा की विधिवत स्थापना और पूजा-अर्चना के बाद सुरंग का निर्माण बिना किसी रुकावट के पूरा हो गया। तभी से यह स्थान चमत्कारी सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
हर नए वाहन के साथ जुड़ी है मां की चुनरी
मंदिर के महंत शुभम गोस्वामी बताते हैं कि यहां आने वाले अधिकांश श्रद्धालु नया वाहन खरीदने के बाद सबसे पहले माता के दरबार में पहुंचते हैं। वाहन की पूजा कराकर उस पर माता की चुनरी बंधवाना वर्षों पुरानी परंपरा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता की चुनरी केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि सुरक्षा और शुभता का आशीर्वाद है। माना जाता है कि मां डाट काली अपने भक्तों और उनके वाहन की हर संकट से रक्षा करती हैं, इसलिए दूर-दराज से आने वाले वाहन चालक और परिवार यहां आकर आशीर्वाद लेते हैं।
101 वर्षों से निरंतर जल रही है अखंड ज्योति
मंदिर की एक और विशेष पहचान यहां पिछले 101 वर्षों से निरंतर प्रज्ज्वलित अखंड ज्योति है। भक्त इसे मां की अनंत शक्ति और कृपा का प्रतीक मानते हैं। नवरात्र, मंगलवार, शनिवार और विशेष पर्वों पर हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन कर नारियल, चुनरी, सिंदूर और प्रसाद अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु बताते हैं कि कठिन परिस्थितियों में मां डाट काली से की गई प्रार्थना ने उन्हें मानसिक शक्ति और नई उम्मीद दी।
आस्था की डोर से जुड़े हैं लाखों श्रद्धालु
दून, सहारनपुर, हरिद्वार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि परीक्षा, नौकरी, नया व्यवसाय, विवाह, गृह प्रवेश या किसी भी शुभ कार्य से पहले लोग यहां आकर माता का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं।
मंदिर की बढ़ती महत्ता का प्रमाण यह भी है कि इसी वर्ष अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मां डाट काली के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना की थी।
223 वर्षों की यह आध्यात्मिक विरासत आज भी श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक बनी हुई है। मां डाट काली का यह सिद्धपीठ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था, सुरक्षा और मनोकामनाओं का ऐसा धाम है, जहां हर दिन विश्वास की नई कहानी लिखी जाती है।

