16 july 2026 : Dehradun!
देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची में पाई गई विसंगतियों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में राज्य के करीब 19 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। निर्वाचन विभाग ने साफ किया है कि यह एक नियमित सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए नोटिस मिलने पर किसी भी मतदाता को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, 25 जुलाई से बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) संबंधित मतदाताओं तक नोटिस पहुंचाना शुरू करेंगे। नोटिस में यह स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि किस कारण से सत्यापन की आवश्यकता है, सुनवाई कब और कहां होगी तथा जवाब देने की समय-सीमा क्या रहेगी। सामान्य तौर पर नोटिस मिलने के बाद सात से दस दिनों के भीतर आवश्यक जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को सरल बनाया है। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी सही है, तो वह सीधे अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क कर सकता है। बीएलओ उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन करने के बाद अपनी रिपोर्ट निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को भेजेंगे। यदि रिपोर्ट संतोषजनक पाई जाती है, तो नोटिस को बिना सुनवाई के भी निरस्त किया जा सकता है। इससे मतदाता को अलग से कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
जिन मामलों में अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता होगी, उनके लिए वार्ड स्तर से लेकर न्याय पंचायत स्तर तक विशेष सुनवाई शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में मतदाता अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर अपना पक्ष रख सकेंगे और आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाना है। इसलिए सभी मतदाताओं से अपील की गई है कि यदि उन्हें नोटिस प्राप्त होता है तो समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं और अपने बीएलओ से संपर्क बनाए रखें, ताकि उनका मामला आसानी और शीघ्रता से निपटाया जा सके।

