देहरादून ; 25 अगस्त 2026,
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित ‘सशक्त बहना उत्सव’ के तहत स्वयं सहायता समूहों की ओर से लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न स्थानीय उत्पादों की खरीदारी भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं के हुनर और मेहनत से तैयार उत्पाद केवल सामान नहीं, बल्कि प्रदेश की लोक संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय कौशल का प्रतिनिधित्व करते हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आगामी त्योहारी अवसरों पर खरीदारी करते समय स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान उपहार, सजावटी सामग्री और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की खरीद स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों से करने से प्रदेश के छोटे उत्पादकों और कारीगरों को सीधे लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने हुनर को स्वरोजगार में बदलकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ने से इन महिलाओं को अपने काम का बेहतर बाजार मिलता है और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी गति मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान ने देश में स्थानीय उत्पादों को लेकर सकारात्मक सोच को मजबूत किया है। उत्तराखंड में भी सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को बाजार से जोड़ने तथा उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि किसी स्थानीय उत्पाद की खरीद का असर केवल दुकानदार या उत्पादक तक सीमित नहीं रहता। इससे उस उत्पाद को तैयार करने वाले परिवार की आय बढ़ती है, महिलाओं के स्वरोजगार को सहारा मिलता है और गांवों तथा स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इस तरह छोटी-छोटी खरीदारी भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे सकती है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि इस बार त्योहारों की खरीदारी में स्थानीय उत्पादों को विशेष स्थान दें और अपने परिवार, मित्रों तथा परिचितों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय हुनर को उपभोक्ताओं का भरोसा और बाजार दोनों मिलेंगे, तभी आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में प्रयास और अधिक प्रभावी होंगे।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना प्रदेश की परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ मेहनतकश महिलाओं, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का माध्यम भी है। सामूहिक प्रयासों से ‘वोकल फॉर लोकल’ को केवल नारे तक सीमित रखने के बजाय इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया जा सकता है।

