देहरादून ; 15.09.2026।
नई दिल्ली। उत्तर भारत की जल, ऊर्जा और सिंचाई जरूरतों से जुड़ी लंबे समय से प्रतीक्षित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं।
किशाऊ परियोजना का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1940 में इसकी कल्पना की गई थी, लेकिन इसके बाद कई दशकों तक यह योजना विभिन्न स्तरों पर आगे बढ़ने की प्रतीक्षा करती रही। करीब 80 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अब केंद्र और राज्यों के बीच सहमति बनने से परियोजना के कार्यान्वयन की उम्मीद एक बार फिर मजबूत हुई है।
बिजली के साथ जल प्रबंधन पर भी जोर
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की प्रस्तावित विद्युत उत्पादन क्षमता 422 मेगावाट है। हालांकि इसका महत्व केवल बिजली पैदा करने तक सीमित नहीं है। परियोजना को जल संसाधनों के व्यापक और व्यवस्थित उपयोग से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को बेहतर करने, पेयजल की उपलब्धता को मजबूत करने और जल सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की संभावना है।
उत्तर भारत के कई हिस्से जल संसाधनों की बढ़ती मांग का सामना कर रहे हैं। ऐसे में किसी बड़े बहुउद्देशीय जल प्रकल्प का आगे बढ़ना भविष्य की जल आवश्यकताओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना के माध्यम से उपलब्ध जल का नियोजित उपयोग विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकता है।
यमुना के पुनर्जीवन से भी जुड़ी उम्मीदें
किशाऊ परियोजना को यमुना नदी से जुड़े जल प्रबंधन और उसके पुनर्जीवन के प्रयासों के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है। यमुना बेसिन से जुड़े क्षेत्रों में जल संरक्षण और नदी के प्रवाह को व्यवस्थित करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। ऐसे में परियोजना से संबंधित जल प्रबंधन तंत्र भविष्य में यमुना के पुनर्जीवन से जुड़े प्रयासों को भी सहयोग दे सकता है।
राज्यों के बीच समन्वय को मिली मजबूती
परियोजना से कई राज्यों के हित जुड़े होने के कारण इसके क्रियान्वयन में राज्यों के बीच सहमति और समन्वय बेहद महत्वपूर्ण रहा है। नई दिल्ली में हुए MoU को इसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। छह राज्यों के एक साथ आने से परियोजना से जुड़े विषयों को साझा सहमति के आधार पर आगे बढ़ाने का आधार तैयार हुआ है।
बैठक में इस बात पर भी जोर रहा कि लंबे समय से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आपसी समन्वय और निर्धारित प्रक्रियाओं के जरिए गति दी जाए। किशाऊ परियोजना इसी दिशा में उठाए गए बड़े कदमों में शामिल हो गई है।
कई क्षेत्रों को मिल सकता है लाभ
परियोजना के धरातल पर आने के बाद इसके प्रभाव का दायरा बिजली उत्पादन से कहीं व्यापक हो सकता है। ऊर्जा क्षेत्र को नई क्षमता मिलने के साथ कृषि के लिए सिंचाई सुविधाओं, पेयजल प्रबंधन और जल संरक्षण से जुड़े प्रयासों को भी लाभ मिलने की संभावना है। इससे संबंधित राज्यों में जल संसाधनों के बेहतर नियोजन और दीर्घकालिक उपयोग की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C R Paatil, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री MYogiAdityanath, हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Saini, दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta और राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma सहित अन्य संबंधित प्रतिनिधि मौजूद रहे।
किशाऊ परियोजना को लेकर हुआ यह समझौता उन बड़ी योजनाओं में एक नई शुरुआत का संकेत है, जो लंबे समय से कागजी प्रक्रिया और विभिन्न स्तरों पर सहमति की प्रतीक्षा में थीं। अब छह राज्यों के बीच औपचारिक सहमति बनने के बाद परियोजना को अगले चरणों में ले जाने की राह अधिक स्पष्ट हुई है।
करीब आठ दशक पहले जिस परियोजना की परिकल्पना की गई थी, उसके क्रियान्वयन की दिशा में अब नए सिरे से गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। आने वाले समय में परियोजना से जुड़ी प्रक्रियाओं के आगे बढ़ने के साथ यह तय होगा कि वर्षों पुराना यह सपना किस गति से वास्तविकता में बदलता है।

