देहरादून ; 14 अक्टूबर 2026 |
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर आज चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जा रही है। देवी आराधना के इस विशेष अवसर पर श्रद्धालु मां के चरणों में शीश झुकाकर परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना कर रहे हैं। सुबह से ही पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार और माता रानी के जयकारों के साथ भक्तिमय वातावरण देखने को मिल रहा है। नवरात्रि का यह दिन भक्तों को जीवन में सकारात्मकता, धैर्य और नई ऊर्जा का संचार करने का आध्यात्मिक संदेश देता है।
मां कूष्मांडा को समर्पित है नवरात्रि का चौथा दिन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जब चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब देवी की दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। इसी कारण मां को सृष्टि में प्रकाश, चेतना और ऊर्जा का संचार करने वाली आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है।
मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य माना गया है। उनकी आठ भुजाएं हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्र और पूजा से जुड़ी वस्तुएं सुशोभित हैं। सिंह पर विराजमान मां का यह स्वरूप भक्तों को निर्भयता, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
विधि-विधान से हो रही माता रानी की पूजा
नवरात्रि के चौथे दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूजा स्थल को स्वच्छ करके दीप प्रज्वलित करते हैं। इसके बाद मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित किए जाते हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मां को भोग लगाते हैं तथा दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और देवी मंत्रों का पाठ करते हैं।
धार्मिक परंपराओं में मां कूष्मांडा को मालपुआ और अन्य मीठे पकवानों का भोग अर्पित करने की मान्यता भी प्रचलित है। हालांकि, पूजा में सबसे अधिक महत्व भक्त की श्रद्धा, पवित्र भाव और सच्चे मन से की गई प्रार्थना को दिया जाता है।
मां की आराधना से मिलता है सकारात्मकता का संदेश
नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की शक्ति को पहचानने का अवसर भी है। मां कूष्मांडा का स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न हों, आशा और विश्वास की एक छोटी-सी किरण भी नई शुरुआत का मार्ग खोल सकती है।
भक्तों के लिए मां की उपासना आत्मबल बढ़ाने, मन को शांत रखने और परिवार के प्रति प्रेम एवं जिम्मेदारी का भाव मजबूत करने का माध्यम है। इस पावन अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता करना, अन्नदान करना और दूसरों के प्रति सद्भाव रखना भी देवी भक्ति की भावना को सार्थक बनाता है।
माता रानी से सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना
नवरात्रि के चौथे दिन श्रद्धालु मां कूष्मांडा से प्रार्थना कर रहे हैं कि हर घर में सुख-शांति बनी रहे, परिवारों में प्रेम बढ़े और समाज में सद्भाव का वातावरण कायम हो। मां की आराधना के साथ भक्त अपने जीवन से नकारात्मक विचारों को दूर कर सेवा, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।
मां कूष्मांडा का पावन संदेश यही है कि जहां श्रद्धा का दीप जलता है, वहां आशा का प्रकाश कभी मंद नहीं पड़ता।
जय माता दी! मां कूष्मांडा सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें और सबके जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य एवं मंगल का संचार करें।

