देहरादून ; 20.10.2026,
देहरादून, देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज विजयादशमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्र के नौ दिनों की आराधना के बाद आया यह पावन अवसर भगवान श्रीराम के आदर्शों को स्मरण करने और अधर्म पर धर्म की विजय का संकल्प लेने का संदेश देता है। शहर में दशहरा आयोजनों को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। परेड ग्राउंड में होने वाला दशहरा महोत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा, जहां 181 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा।
परेड ग्राउंड में होगा भव्य दशहरा महोत्सव
देहरादून के परेड ग्राउंड में बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से 79वें दशहरा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष 181 फीट ऊंचा रावण का पुतला उत्सव का प्रमुख आकर्षण है। आयोजन के लिए शोभायात्रा की भी व्यवस्था की गई है, जो कालिका मंदिर से शुरू होकर मोती बाजार, पलटन बाजार, राजपुर रोड, एस्लेहॉल और कनक चौक से होते हुए परेड ग्राउंड पहुंचेगी।
दशहरा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की उस विचारधारा का प्रतीक है, जिसमें सत्य, मर्यादा और धर्म को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। रावण के विशाल पुतले का दहन लोगों को यह याद दिलाता है कि अहंकार और अन्याय चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न दिखाई दें, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।
भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का पर्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी का संबंध भगवान श्रीराम द्वारा लंकापति रावण पर प्राप्त विजय से है। रामायण की यह कथा मानव जीवन को मर्यादा, धैर्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीराम ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आदर्शों का त्याग नहीं किया और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
आज के समय में दशहरे का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। रावण के दस सिर को प्रतीकात्मक रूप से काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अहंकार, ईर्ष्या और अन्य मानवीय दुर्गुणों से जोड़कर भी देखा जाता है। ऐसे में रावण दहन का वास्तविक अर्थ केवल एक पुतले को जलते देखना नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का संकल्प लेना भी है।
मां दुर्गा की आराधना और विजय का आध्यात्मिक महत्व
विजयादशमी का पर्व मां दुर्गा की शक्ति और महिषासुर पर उनकी विजय की धार्मिक परंपरा से भी जुड़ा है। नवरात्र के दौरान भक्तों ने मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की। विजयादशमी इस साधना के समापन के साथ शक्ति, साहस और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश देती है।
देहरादून में भी मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु अपनी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर पर्व की शुभता का अनुभव कर रहे हैं। इस अवसर पर घरों में पूजा, बड़ों का आशीर्वाद लेने और शुभ कार्यों की शुरुआत करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
उत्सव के साथ सामाजिक एकता का संदेश
दशहरा समाज को आपसी प्रेम, सद्भाव और सहयोग की भावना से जोड़ने वाला पर्व भी है। रामलीला के मंचन से लेकर शोभायात्राओं और रावण दहन तक, इन आयोजनों में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय लोक संस्कृति की झलक भी दिखाई देती है। बच्चों और युवाओं के लिए रामायण के प्रसंगों को समझने तथा परिवारों के लिए अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का यह विशेष अवसर है।
इस पर्व की सार्थकता तभी पूरी होती है, जब धार्मिक उत्साह के साथ दूसरों के प्रति सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता और समाज में सद्भाव बनाए रखने का भाव भी मजबूत हो। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि शक्ति का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि न्याय और जनकल्याण के लिए किया जाना चाहिए।
यातायात व्यवस्था को लेकर रहें सतर्क
परेड ग्राउंड में दशहरा महोत्सव और शोभायात्रा को देखते हुए पुलिस ने यातायात व्यवस्था में बदलाव किए हैं। आयोजन के दौरान परेड ग्राउंड के आसपास जीरो जोन लागू रहेगा और निर्धारित स्थानों पर बैरियर लगाए गए हैं। ऐसे में कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को घर से निकलने से पहले यातायात संबंधी नवीनतम निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए तथा पुलिस द्वारा निर्धारित पार्किंग और मार्गों का पालन करना चाहिए।
बुराई छोड़ने और अच्छाई अपनाने का लें संकल्प
देहरादून में विजयादशमी का यह पावन अवसर भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। रावण दहन की अग्नि के साथ मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार, द्वेष, क्रोध और अन्याय को समाप्त करने का संकल्प भी लेना चाहिए। यही इस पर्व की वास्तविक आध्यात्मिक उपलब्धि है।
विजयादशमी का संदेश स्पष्ट है—जहां सत्य है, वहां धर्म है; जहां धर्म है, वहां न्याय है और जहां न्याय है, वहीं सच्ची विजय है। आइए, इस दशहरे पर प्रभु श्रीराम से सद्बुद्धि, साहस और सदाचार की प्रेरणा लेकर अपने परिवार, समाज और देवभूमि उत्तराखंड के सुख-समृद्ध भविष्य की कामना करें।

