देहरादून ; 16.10.2026,
जिला स्तर पर कौशल विकास योजनाएं बनाकर पोर्टल पर होंगी अपलोड, उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण देने पर रहेगा जोर
देहरादून। उत्तराखंड में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और उद्योगों की जरूरत के मुताबिक कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए राज्य सरकार कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में स्टेट स्किल डेवलपमेंट प्लान तैयार करने को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग, उद्योग जगत और निजी प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें राज्य से लेकर जिला स्तर तक कौशल विकास की जरूरतों का आकलन कर योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में कौशल विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करते समय स्थानीय रोजगार संभावनाओं, उद्योगों की मांग और उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर मिल सकें। इसके लिए प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं का विस्तृत आकलन किया जाना चाहिए।
सभी जिलों की कौशल विकास योजना जल्द तैयार करने के निर्देश
बैठक में मुख्य सचिव ने सभी जनपदों के लिए डिस्ट्रिक्ट स्किल डेवलपमेंट प्लान शीघ्र तैयार करने और उन्हें संबंधित पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले की जरूरतें और रोजगार की संभावनाएं अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए कौशल विकास की योजनाएं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाई जानी चाहिए।
जिला स्तर पर यह आकलन किया जाना आवश्यक है कि किन क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं अधिक हैं, वहां किस प्रकार के प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत है और वर्तमान में प्रशिक्षण देने के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लक्ष्य निर्धारित किए जाएं, ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
रोजगार की मांग और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के बीच की खाई होगी दूर
मुख्य सचिव ने उद्योगों की जरूरतों और प्रशिक्षण संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों के बीच मौजूद अंतर को दूर करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं होने के बावजूद आवश्यक कौशल से जुड़े प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं होते। ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार अवसरों और प्रशिक्षण के लक्ष्यों का तुलनात्मक आकलन किया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी है और युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने के लिए किस तरह के प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
उभरते कौशल क्षेत्रों पर रहेगा विशेष ध्यान
बैठक में बदलती औद्योगिक जरूरतों और रोजगार के नए अवसरों को देखते हुए उभरते हुए कौशल क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने इस संबंध में सेतु आयोग के अध्ययन का उपयोग करने को कहा, ताकि कौशल विकास की भावी जरूरतों को समझते हुए प्रशिक्षण योजनाओं को तैयार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी से प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को अधिक उपयोगी बनाने और युवाओं को व्यावहारिक कौशल प्रदान करने में मदद मिल सकती है।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर भी होगी निगरानी
मुख्य सचिव ने कौशल विकास कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करने और प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का समय-समय पर आकलन किया जाए, ताकि उनकी उपयोगिता और प्रभावशीलता का पता चल सके। इसके साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता की जांच के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट कराने पर भी जोर दिया गया।
इस प्रक्रिया के माध्यम से प्रशिक्षण संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं, संचालित पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण की गुणवत्ता का आकलन किया जा सकेगा। साथ ही, जहां सुधार की आवश्यकता हो, वहां आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में सचिव सी. रविशंकर, श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव मनुज गोयल, रोहित मीणा, नवनीत पाण्डे, अनुराधा पाल और नरेन्द्र सिंह भण्डारी उपस्थित रहे। इसके अलावा भारतीय उद्योग संघ (उत्तराखंड) के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सीआईआई (यूके) के निदेशक गौरव लांबा तथा बजाज इंजीनियरिंग स्किल्स ट्रेनिंग सेंटर से डॉ. सचिन शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
स्टेट स्किल डेवलपमेंट प्लान और जिला स्तरीय योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में कौशल विकास कार्यक्रमों को रोजगार की वास्तविक मांग के अनुरूप तैयार करने, प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।

