12 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। उत्तराखंड के पारंपरिक देववन और आस्था वन अब केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें पर्यावरण संरक्षण की मजबूत कड़ी के रूप में भी विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार की आस्था वन संरक्षण योजना को मंजूरी मिलने के बाद राज्य में ऐसे पवित्र वनों के संरक्षण, संवर्धन और दस्तावेजीकरण की दिशा में नई पहल शुरू होने की उम्मीद है।
उत्तराखंड में लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे अनेक वन मौजूद हैं, जिन्हें स्थानीय समुदाय देवी-देवताओं से जुड़ा मानकर उनकी विशेष देखभाल करता है। धार्मिक मान्यताओं के कारण इन वनों में पेड़ों की कटाई पर सामाजिक रोक रही है, जिससे यहां की जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन वर्षों से सुरक्षित बना हुआ है। अब इन्हीं पारंपरिक संरक्षण प्रणालियों को सरकारी स्तर पर भी मजबूती देने की तैयारी की जा रही है।
हाल ही में कोयंबटूर में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) के शासी निकाय की बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना को स्वीकृति दी गई। योजना के तहत वर्ष 2030-31 तक देशभर में लगभग 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाले वनों की पहचान कर उनका संरक्षण, प्राकृतिक पुनर्जीवन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए यह योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यहां के देववन केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन वनों को योजनाबद्ध तरीके से संरक्षित किया गया तो जल स्रोतों का संरक्षण, वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास और स्थानीय जैव विविधता को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
वन विभाग के साथ स्थानीय ग्राम सभाओं, धार्मिक संस्थाओं और समुदायों की भागीदारी इस योजना की सफलता का प्रमुख आधार होगी। साथ ही लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने और पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आस्था और प्रकृति के इस अनोखे संगम को सहेजने की दिशा में शुरू हुई यह पहल उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

