12 july 2026 !
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलधार बारिश का असर अब जल विद्युत उत्पादन पर भी स्पष्ट दिखाई देने लगा है। यमुना, टोंस और अन्य सहायक नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के चलते यमुना घाटी के कई जल विद्युत केंद्रों का संचालन सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। नदियों में तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर ने बिजली उत्पादन की प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया है, जिससे राज्य के जल विद्युत क्षेत्र को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पछवादून क्षेत्र में कुल छह जल विद्युत केंद्र संचालित हैं, जिनमें से चार केंद्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद ढकरानी और ढालीपुर जल विद्युत केंद्रों को बंद करना पड़ा। इसके बाद टोंस नदी में जल प्रवाह बढ़ने पर छिबरो और खोदरी जल विद्युत केंद्रों में भी बिजली उत्पादन रोक दिया गया। अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय परियोजनाओं की मशीनरी और अन्य उपकरणों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए लिया गया है।
संबंधित अधिकारियों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण नदियों में पानी के साथ भारी मात्रा में गाद, पत्थर और अन्य मलबा भी बहकर आ रहा है। ऐसी स्थिति में टरबाइनों के सुरक्षित संचालन में कठिनाई होती है। इसलिए जलस्तर सामान्य होने और नदी का प्रवाह नियंत्रित होने के बाद ही इन परियोजनाओं से दोबारा बिजली उत्पादन शुरू किया जाएगा।
जल विद्युत उत्पादन बंद होने से उत्तराखंड जल विद्युत निगम को राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए अन्य उपलब्ध स्रोतों से बिजली व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी वर्षा की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन और जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े अधिकारी लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों से भी सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से नदी के पास नहीं जाने की अपील की गई है।

