देहरादून ; 2 अक्टूबर 2026,
मुजफ्फरनगर। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों की स्मृति में रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में पहुंचकर शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित किए और पृथक उत्तराखण्ड राज्य के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने राज्य आंदोलन की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन राज्य आंदोलनकारी शहीदों की प्रतिमाएं अभी तक स्थापित नहीं हो सकी हैं, उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव अथवा निवास क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाएंगी। रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण के साथ स्मारक परिसर की व्यवस्थाओं को भी आधुनिक स्वरूप देने की बात कही गई।
ई-लाइब्रेरी और विस्तारित संग्रहालय बनेगा आकर्षण
रामपुर तिराहा शहीद स्मारक परिसर में मौजूद पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही संग्रहालय का विस्तार किया जाएगा। प्रस्तावित विस्तार में उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी सामग्री को शामिल किया जाएगा। इससे राज्य आंदोलन के इतिहास के साथ उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को भी एक ही परिसर में प्रदर्शित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण की प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने की बात कही। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य पात्र आंदोलनकारियों और उनके परिवारों से जुड़े मामलों का समयबद्ध समाधान करना है।
रामपुर तिराहा की घटना को बताया आंदोलन का पीड़ादायक अध्याय
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 और 2 अक्टूबर 1994 की मध्यरात्रि रामपुर तिराहा में दिल्ली की ओर जा रहे राज्य आंदोलनकारियों के साथ हुई घटना उत्तराखण्ड आंदोलन के इतिहास का बेहद पीड़ादायक अध्याय है। उन्होंने कहा कि अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा, श्रीनगर के श्री यंत्र टापू सहित कई स्थानों पर संघर्ष किया और अनेक लोगों ने अपना जीवन बलिदान किया।
धामी ने कहा कि इन संघर्षों और बलिदानों के लंबे दौर के बाद उत्तराखण्ड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों के सपनों और उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदेश के विकास के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जाने की बात कही।
आंदोलनकारियों और आश्रितों के लिए सुविधाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि राजकीय सेवाओं में राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू है। आरक्षण के माध्यम से लाभान्वित आश्रितों को नियुक्ति पत्र भी दिए गए हैं।
आश्रित प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अब इन्हें तहसील स्तर से जारी किए जाने के आदेश दिए गए हैं। आंदोलनकारियों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का गठन भी किया गया है।
इसके अलावा राज्य पर्वों, जिला एवं प्रदेश स्तरीय कार्यक्रमों में आंदोलनकारियों को आमंत्रित कर सम्मानित करने तथा परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा दिए जाने की जानकारी दी गई।
शहीदों के नाम पर होंगे सड़क और विद्यालय
राज्य सरकार की ओर से शहीद राज्य आंदोलनकारियों की स्मृति को स्थायी रूप देने के लिए सड़कों और विद्यालयों के नाम उनके नाम पर रखे जाने के संबंध में आदेश जारी किए जा चुके हैं। वहीं रामपुर तिराहा, खटीमा, देहरादून और मसूरी स्थित शहीद स्थलों के पुनर्निर्माण एवं विस्तार की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
कार्यक्रम के दौरान रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए राज्य आंदोलनकारियों की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने के कार्य का शिलान्यास भी किया गया। इसके लिए 27 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है।
स्मारक के लिए जमीन देने वाले महावीर शर्मा को भी किया याद
मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक के लिए भूमि उपलब्ध कराने वाले स्वर्गीय पंडित महावीर शर्मा के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि स्मारक परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है, जो इस स्थल के निर्माण में उनके योगदान की याद दिलाती रहेगी।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल, विधान परिषद सदस्य वंदना वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मुजफ्फरनगर भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सुधीर सैनी, उत्तराखण्ड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, संस्कृति सचिव युगल किशोर पंत, हरिद्वार जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

