18 june 2026
देहरादून। उत्तराखंड की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक उद्यमिता से जोड़ते हुए पिथौरागढ़ की युवा छात्रा मानसी कापड़ी ने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। लक्ष्मण सिंह महार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीबीए की पढ़ाई कर रही मानसी ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा और मेहनत के बल पर पारंपरिक ऐपन कला को केवल शौक तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे स्वरोजगार और पहचान का माध्यम बना दिया।
मानसी की सफलता की कहानी वर्ष 2024 में नई दिशा की ओर बढ़ी, जब उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), अहमदाबाद के सहयोग से संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना के द्विदिवसीय बूटकैंप में भाग लिया। इस कार्यक्रम ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि स्थानीय कला और पारंपरिक कौशल को व्यवसायिक रूप देकर आत्मनिर्भरता की राह कैसे बनाई जा सकती है।
बचपन का शौक बना भविष्य की पहचान
मानसी को बचपन से ही उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपन कला में विशेष रुचि थी। वे विभिन्न अवसरों और त्योहारों पर आकर्षक ऐपन डिज़ाइन तैयार करती थीं। हालांकि, उस समय यह केवल उनकी व्यक्तिगत रुचि और रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम था। लेकिन उद्यमिता प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अपनी कला की व्यावसायिक संभावनाओं का एहसास हुआ।
बूटकैंप में विशेषज्ञों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन, व्यवसाय प्रबंधन की जानकारी और विपणन से जुड़े सुझावों ने मानसी को अपनी प्रतिभा को एक उद्यम के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने ऐपन कला से जुड़े उत्पादों और डिज़ाइनों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने की दिशा में काम शुरू किया।
देवभूमि उद्यमिता योजना दे रही युवाओं को नई उड़ान
वर्ष 2023 से उत्तराखंड के 119 राजकीय महाविद्यालयों और 5 विश्वविद्यालयों में संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना का उद्देश्य युवाओं में नवाचार और उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देना है। यह योजना छात्रों को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
मानसी कापड़ी जैसी कई युवा प्रतिभाएँ इस पहल के माध्यम से अपने हुनर को पहचान दिलाने और आर्थिक अवसरों में बदलने में सफल हो रही हैं। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें, तो स्थानीय कला और संस्कृति भी आधुनिक उद्यमिता का मजबूत आधार बन सकती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं मानसी
मानसी की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपनी प्रतिभा को केवल शौक मानकर सीमित कर देते हैं। उन्होंने दिखाया है कि पारंपरिक विरासत, रचनात्मक सोच और उद्यमशीलता का संगम न केवल व्यक्तिगत सफलता दिला सकता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति को भी नई पहचान प्रदान कर सकता है।
आज मानसी कापड़ी उत्तराखंड की युवा पीढ़ी के लिए आत्मनिर्भरता, नवाचार और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरी हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सपनों को सही दिशा और मेहनत का साथ मिले तो छोटी शुरुआत भी बड़ी उपलब्धि में बदल सकती है।

