देहरादून ; 17.10.2026,
मसूरी, लैंढौर और नैनीताल में फिल्मों की शूटिंग से बढ़ेगा उत्तराखण्ड का आकर्षण, स्थानीय कारोबार और प्रतिभाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर
देहरादून। उत्तराखण्ड की प्राकृतिक खूबसूरती, मनमोहक पर्वतीय वादियां, ऐतिहासिक स्थल और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत अब फिल्म निर्माताओं को तेजी से आकर्षित कर रही हैं। राज्य में बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स की शूटिंग होने से उत्तराखण्ड की पहचान एक प्रमुख फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में मजबूत हो रही है। इन दिनों अभिनेता अक्षय कुमार मसूरी और लैंढौर क्षेत्र में, जबकि अभिनेत्री जाह्नवी कपूर नैनीताल में फिल्म शूटिंग कर रही हैं। बड़े सितारों और फिल्म निर्माण इकाइयों की मौजूदगी से राज्य के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।
उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों की प्राकृतिक विविधता फिल्म निर्माताओं को अलग-अलग तरह के दृश्य फिल्माने का अवसर प्रदान करती है। कहीं घने जंगल और ऊंचे पहाड़ हैं, तो कहीं औपनिवेशिक दौर की वास्तुकला, शांत झीलें और पारंपरिक पहाड़ी जीवनशैली फिल्मों के लिए आकर्षक पृष्ठभूमि तैयार करते हैं। यही वजह है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्र फिल्म निर्माताओं के लिए संभावनाओं से भरे हुए हैं।
फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा उत्तराखण्ड
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक विरासत राज्य को फिल्म शूटिंग के लिए विशिष्ट बनाती हैं। सरकार का उद्देश्य उत्तराखण्ड को देश के प्रमुख फिल्म शूटिंग स्थलों में स्थापित करना है, ताकि अधिक से अधिक फिल्म निर्माता यहां आकर अपनी फिल्मों की शूटिंग कर सकें।
उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने, शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने और स्थानीय प्रतिभाओं को फिल्म उद्योग से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि फिल्म निर्माण से मिलने वाले अवसरों का लाभ राज्य के स्थानीय लोगों तक भी पहुंचे और उत्तराखण्ड की पहचान देश-दुनिया में और अधिक मजबूत हो।
फिल्म शूटिंग से स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
फिल्मों की शूटिंग का लाभ केवल पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहता। किसी बड़े फिल्म प्रोजेक्ट की शूटिंग के दौरान कलाकारों, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों की टीम को लंबे समय तक संबंधित क्षेत्र में रहना पड़ सकता है। इससे होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, परिवहन, खान-पान और अन्य स्थानीय सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावनाएं रहती हैं।
फिल्म यूनिटों को स्थानीय स्तर पर वाहन, रहने की व्यवस्था, भोजन, उपकरणों और विभिन्न प्रकार की सेवाओं की आवश्यकता होती है। ऐसे में स्थानीय व्यवसायियों, टैक्सी संचालकों, होटल कारोबारियों, युवाओं और सेवा प्रदाताओं को काम के नए अवसर मिल सकते हैं। यदि फिल्म निर्माण में स्थानीय संसाधनों और मानवशक्ति की भागीदारी बढ़ती है, तो इसका लाभ छोटे कारोबारियों तक भी पहुंच सकता है।
स्थानीय कलाकारों और युवाओं के लिए नए अवसर
उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माण गतिविधियों का विस्तार स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, सहायक निर्देशकों, फोटोग्राफरों और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिल्म प्रोजेक्ट्स के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को अपने कौशल का प्रदर्शन करने और फिल्म उद्योग के साथ काम करने का अवसर मिल सकता है।
राज्य में फिल्म निर्माण का अनुकूल वातावरण विकसित होने से भविष्य में स्थानीय स्तर पर तकनीकी प्रशिक्षण, प्रोडक्शन से जुड़ी सेवाओं और रचनात्मक कार्यों की मांग बढ़ने की संभावनाएं भी हैं। इससे युवाओं को अपने प्रदेश में ही रोजगार और स्वरोजगार के विकल्प तलाशने में मदद मिल सकती है।
उत्तराखण्ड फिल्म नीति 2024 से आसान होंगी शूटिंग संबंधी प्रक्रियाएं
राज्य सरकार उत्तराखण्ड फिल्म नीति 2024 के माध्यम से फिल्म निर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास कर रही है। इसके तहत फिल्म निर्माताओं के लिए सुविधाजनक माहौल तैयार करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम के जरिए फिल्म निर्माताओं को शूटिंग संबंधी अनुमतियां प्राप्त करने में सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत सात दिनों के भीतर शूटिंग की अनुमति उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उद्देश्य फिल्म निर्माताओं के लिए प्रक्रियागत बाधाओं को कम करना और समयबद्ध समन्वय सुनिश्चित करना है।
सरल प्रक्रियाओं और आवश्यक सहयोग के जरिए राज्य में फिल्म निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय कलाकारों एवं तकनीशियनों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
मसूरी, लैंढौर और नैनीताल को मिल सकती है नई पहचान
मसूरी और लैंढौर अपनी खूबसूरत पहाड़ियों, पुराने भवनों, प्राकृतिक वातावरण और विशिष्ट पहाड़ी जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। वहीं नैनीताल की झील, आसपास की पर्वतीय वादियां और आकर्षक प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों के साथ-साथ फिल्म निर्माताओं को भी आकर्षित करते हैं।
जब इन स्थानों को फिल्मों के माध्यम से बड़े पर्दे पर दिखाया जाता है, तो देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले दर्शकों के बीच इनकी पहचान बढ़ सकती है। फिल्म देखने के बाद कई दर्शक संबंधित स्थानों को करीब से देखने की इच्छा रखते हैं। ऐसे में फिल्म पर्यटन भविष्य में इन क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त संभावनाएं पैदा कर सकता है।
हालांकि, पर्यटन को वास्तविक आर्थिक लाभ में बदलने के लिए स्थानीय सुविधाओं का विकास, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं भी जरूरी होंगी। पर्वतीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए फिल्म शूटिंग और पर्यटन गतिविधियों का संचालन किया जाना महत्वपूर्ण है।
फिल्म विकास परिषद की भूमिका भी अहम
उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को फिल्म माध्यम से व्यापक पहचान दिलाने के उद्देश्य से काम कर रही है। फिल्म निर्माताओं को राज्य में उपलब्ध संभावनाओं से परिचित कराने, शूटिंग के लिए सुविधाजनक वातावरण विकसित करने और फिल्म निर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण है।
बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स की शूटिंग से उत्तराखण्ड को केवल पर्यटन के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में भी अपनी संभावनाएं मजबूत करने का अवसर मिल रहा है। इससे स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और राज्य की प्रतिभाओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराने की दिशा में नए रास्ते खुल सकते हैं।
फिल्म पर्यटन को अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर
उत्तराखण्ड में बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स की शूटिंग राज्य के लिए एक सकारात्मक अवसर है। इससे पर्यटन स्थलों का प्रचार, स्थानीय कारोबार का विस्तार और युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। आने वाले समय में यदि फिल्म निर्माताओं को बेहतर सुविधाएं, समयबद्ध अनुमतियां और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सहयोग मिलता है, तो उत्तराखण्ड फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को फिल्मों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना इस दिशा में अहम रहेगा। फिल्म शूटिंग, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होने से उत्तराखण्ड को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावनाएं हैं।

