देहरादून ; 2 अक्टूबर 2026,
मियांवाला में 8.64 करोड़ की लागत से विकसित पार्क का मुख्यमंत्री धामी ने किया लोकार्पण, पुराने जलस्रोत को नया जीवन देकर तैयार हुआ आकर्षण का केंद्र,
राजधानी देहरादून के तेजी से बदलते शहरी स्वरूप के बीच मियांवाला क्षेत्र को एक ऐसी सौगात मिली है, जो विकास के साथ-साथ प्रकृति और जल संरक्षण की कहानी भी कहती है। लंबे समय तक उपेक्षित रहे पुराने जौहड़ को नया जीवन देकर तैयार किया गया ‘जल सृष्टि पार्क’ अब दून की नई पहचान के रूप में सामने आया है। करीब 8.64 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस पार्क का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकार्पण किया।
कभी जिस स्थान के आसपास झाड़ियां और कूड़े के ढेर नजर आते थे, आज वही जगह तालाब, हरियाली, पेडल बोटिंग और सैर-सपाटे की सुविधाओं से गुलजार होने को तैयार है। खास बात यह है कि पार्क तैयार करने के लिए पुराने तालाब को खत्म नहीं किया गया, बल्कि उसी जलस्रोत को परियोजना के केंद्र में रखकर उसका पुनर्जीवन किया गया। यही पहल इस पार्क को देहरादून के दूसरे सामान्य पार्कों से अलग बनाती है।
जौहड़ से जल सृष्टि तक का सफर
राजकीय इंटर कॉलेज मियांवाला के पास स्थित यह पुराना जलस्रोत लंबे समय से उपेक्षा का सामना कर रहा था। आसपास का क्षेत्र झाड़ियों और कूड़े के कारण आकर्षण का केंद्र नहीं था। एमडीडीए की परियोजना ने इसी स्थान की तस्वीर बदलने का काम किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार परियोजना का निर्माण मार्च 2024 में शुरू हुआ और मार्च 2026 में पूरा हुआ।
अब यहां तालाब के बीच एक आकर्षक आइलैंड तैयार किया गया है। पेडल बोट के जरिए लोग तालाब की सैर करते हुए इस आइलैंड तक पहुंच सकेंगे। इसके अलावा पार्क में घूमने और बैठने के लिए सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे यह स्थान परिवारों, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में तैयार हुआ है।
धामी बोले—विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी
पार्क के लोकार्पण के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे स्वच्छ, स्वस्थ और हरित देहरादून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि जल सृष्टि पार्क प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय का उदाहरण है। मुख्यमंत्री के मुताबिक पुराने तालाब को खत्म करने के बजाय उसका पुनर्जीवन किया जाना इस परियोजना की विशेषता है।
मुख्यमंत्री धामी ने जल और जंगल को भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए जलस्रोतों और तालाबों के संरक्षण को आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जोड़ा। उनका कहना था कि विकास का अर्थ केवल कंक्रीट के ढांचे खड़े करना नहीं है, बल्कि लोगों का जीवन बेहतर बनाना, शहर को सुंदर बनाना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना भी विकास का हिस्सा है।
दून में ही ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ का दावा
मियांवाला के इस पार्क को स्थानीय लोगों के लिए मनोरंजन और सैर का नया विकल्प माना जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पार्क के विकास के बाद रायपुर क्षेत्र के लोगों को देहरादून में ही प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताने का अवसर मिलेगा और यहां ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ महसूस की जा सकेगी।
इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि देहरादून का शहरी विस्तार लगातार हो रहा है। शहर में आबादी और निर्माण बढ़ने के साथ खुले हरे क्षेत्र और जलस्रोतों का संरक्षण भी महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में किसी पुराने जलस्रोत को संरक्षित करते हुए उसके आसपास सार्वजनिक सुविधा विकसित करना शहर की बदलती जरूरतों से जुड़ा कदम है।
रायपुर क्षेत्र के विकास से जुड़ी बड़ी तस्वीर
जल सृष्टि पार्क को केवल एक पार्क के रूप में नहीं देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने लोकार्पण के दौरान रायपुर क्षेत्र में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सीवर और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यों का भी उल्लेख किया। बरसात के दौरान जलभराव और बाढ़ की समस्या को कम करने के लिए नदियों और बरसाती नालों पर बाढ़ सुरक्षा तथा चैनलाइजेशन के कार्य किए जाने की बात भी कही गई।
देहरादून के बढ़ते विस्तार के बीच पानी की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने सौंग बांध परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे भविष्य में देहरादून की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। यानी जल सृष्टि पार्क जैसी स्थानीय परियोजना को शहर की व्यापक जल और पर्यावरण संबंधी जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्क की खूबसूरती जितनी जरूरी, रखरखाव भी उतना ही अहम
किसी भी सार्वजनिक स्थल की असली सफलता उसके निर्माण के बाद शुरू होती है। जल सृष्टि पार्क को लंबे समय तक स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना अब प्रशासन के साथ स्थानीय लोगों की भी जिम्मेदारी होगी। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों से पार्क को सरकारी संपत्ति के बजाय अपना पार्क समझकर उसकी साफ-सफाई और हरियाली बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की।
अगर स्थानीय स्तर पर इसकी नियमित देखरेख होती है तो यह पार्क मियांवाला और रायपुर क्षेत्र के लोगों के लिए रोजमर्रा की सैर और परिवार के साथ समय बिताने का स्थायी ठिकाना बन सकता है। साथ ही, देहरादून आने वाले लोगों के लिए भी यह शहर के भीतर एक नया आकर्षण जोड़ सकता है।
जल संरक्षण की सोच से जुड़ी दून की नई पहचान
जल सृष्टि पार्क की कहानी केवल एक नए पार्क के निर्माण की कहानी नहीं है। यह उस सोच को सामने लाती है जिसमें पुराने जलस्रोत को मिटाने के बजाय उसे बचाकर आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़ा गया है। तालाब को केंद्र में रखकर विकसित की गई हरियाली और मनोरंजन सुविधाएं देहरादून के शहरी विकास में एक अलग तस्वीर पेश करती हैं।
मियांवाला का यह बदलाव आने वाले समय में दून के दूसरे उपेक्षित जलस्रोतों के संरक्षण के लिए भी चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल, जिस जगह से कभी लोग दूरी बनाते थे, वहीं अब पानी की लहरों, हरियाली और सैर की गतिविधियों के बीच देहरादून को एक नया सार्वजनिक स्थल और मियांवाला को एक नई पहचान मिल गई है।

