देहरादून ; 1 अक्टूबर 2026,
देहरादून। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। जयंती की पूर्व संध्या पर जारी संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्री का जीवन पद और प्रतिष्ठा से अधिक जिम्मेदारी, अनुशासन और राष्ट्रहित को महत्व देने की प्रेरणा देता है।
धामी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में शास्त्री की पहचान उनके सरल व्यक्तित्व और स्पष्ट कार्यशैली से बनी। उन्होंने अपने व्यवहार और फैसलों के जरिए यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि देश का नेतृत्व करने के लिए भव्य जीवनशैली नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति, नैतिक प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी का भाव आवश्यक है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, देश के सामने जब चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां थीं, तब शास्त्री ने लोगों में भरोसा कायम रखने और राष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने पर जोर दिया। उनका नेतृत्व कठिन समय में संयम के साथ निर्णय लेने और देशवासियों को साझा उद्देश्य के लिए प्रेरित करने की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।
उन्होंने कहा कि ‘जय जवान, जय किसान’ के माध्यम से शास्त्री ने राष्ट्र निर्माण के दो महत्वपूर्ण आधारों की ओर देश का ध्यान खींचा। सीमा की सुरक्षा में जुटे जवान और देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने वाला किसान, दोनों ही राष्ट्र की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि दशकों बाद भी यह संदेश देश की सामूहिक चेतना में अपनी जगह बनाए हुए है।
धामी ने कहा कि शास्त्री का व्यक्तित्व केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी के लिए भी सीख का स्रोत है। उनके जीवन से ईमानदारी के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन करने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को रखने की प्रेरणा मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्री की जयंती पर उनके विचारों को याद करने के साथ समाज में कर्तव्य, अनुशासन और सेवा की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया जाना चाहिए। यही उनके आदर्शों के प्रति वास्तविक सम्मान होगा।

