23.09.2026, देहरादून ;
देहरादून। उत्तराखंड में साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों के बीच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की साइबर कुमाऊं यूनिट ने एक बड़े अवैध टेलीकॉम नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। टीम ने पहली बार राज्य में SIM Box तकनीक के जरिए संचालित किए जा रहे अवैध टेलीकॉम गेटवे का खुलासा किया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अवैध सिम कार्ड और तकनीकी उपकरण बरामद किए गए हैं।
STF की कार्रवाई में 114 अवैध सिम कार्ड, 2 SIM Box, 77 एंटीना, राउटर, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस सिस्टम का इस्तेमाल विदेशी और VoIP कॉल्स को भारतीय मोबाइल नंबरों के जरिए कनेक्ट करने के लिए किया जा रहा था। यानी विदेश से इंटरनेट के माध्यम से आने वाली कॉल को तकनीकी प्रक्रिया के जरिए इस तरह प्रस्तुत किया जाता था, जिससे सामने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर वह भारतीय लोकल नंबर से आई कॉल दिखाई दे।
SIM Box के जरिए बदल दी जाती थी कॉल की पहचान
SIM Box एक ऐसा उपकरण है जिसमें एक साथ बड़ी संख्या में मोबाइल SIM कार्ड लगाए जा सकते हैं। इसका वैध इस्तेमाल कुछ टेलीकॉम और तकनीकी परिस्थितियों में हो सकता है, लेकिन अवैध रूप से इस्तेमाल किए जाने पर यह विदेशी या इंटरनेट आधारित कॉल को मोबाइल नेटवर्क के जरिए स्थानीय कॉल के रूप में आगे भेजने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
STF की जांच में सामने आए नेटवर्क में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली है। इससे कॉल की वास्तविक उत्पत्ति को छिपाने में मदद मिलती थी। विदेशी नंबर या इंटरनेट आधारित कॉल सीधे सामने आने के बजाय भारतीय मोबाइल नंबर से आने वाली सामान्य कॉल के रूप में दिखाई दे सकती थी।
यही वजह है कि जांच एजेंसियों के लिए ऐसे नेटवर्क साइबर अपराध की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। स्थानीय नंबर देखकर कॉल प्राप्त करने वाला व्यक्ति कई बार यह समझ नहीं पाता कि कॉल वास्तव में देश के बाहर से संचालित की जा रही है।
करीब सात महीने से सक्रिय था नेटवर्क
जांच में यह भी पता चला है कि कथित अवैध टेलीकॉम गेटवे करीब सात महीने से संचालित किया जा रहा था। इस अवधि के दौरान बड़ी संख्या में SIM कार्ड का इस्तेमाल नेटवर्क में किया गया। STF अब बरामद किए गए SIM कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित तकनीकी जानकारी जुटा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिस्टम से कितनी कॉल संचालित हुईं और इसका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि SIM कार्ड किसके नाम पर लिए गए थे, उन्हें नेटवर्क में किस तरह सक्रिय किया गया और इनके संचालन के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
बांग्लादेश के साइबर अपराधियों से जुड़ने की कड़ी
STF की प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के तार बांग्लादेश से जुड़े साइबर अपराधियों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इस कनेक्शन को लेकर अब जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि विदेश में बैठे लोगों और उत्तराखंड में संचालित इस कथित नेटवर्क के बीच किस प्रकार का संपर्क था।
यह भी जांच का हिस्सा है कि नेटवर्क को विदेश से तकनीकी निर्देश मिल रहे थे या फिर इसका इस्तेमाल किसी बड़े साइबर अपराध नेटवर्क के लिए स्थानीय स्तर पर किया जा रहा था।
डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी में इस्तेमाल की आशंका
STF के सामने जांच के दौरान यह भी तथ्य आया है कि SIM Box तकनीक का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट और दूसरे साइबर अपराधों में किया जा सकता है। आजकल साइबर ठगी करने वाले अपराधी पुलिस अधिकारी, CBI, ED, कस्टम अधिकारी या अन्य सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को फोन करते हैं।
ऐसे मामलों में अगर कॉल किसी भारतीय मोबाइल नंबर से आती है तो पीड़ित के लिए उस कॉल को सामान्य समझना आसान हो सकता है। अपराधी बातचीत के दौरान डर का माहौल बनाकर बैंक खाते, डिजिटल भुगतान या अन्य माध्यमों से पैसे ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं।
हालांकि STF की जांच में बरामद SIM Box नेटवर्क से जुड़े वास्तविक साइबर अपराधों और कॉल की पूरी कड़ी की पुष्टि के लिए डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
77 एंटीना समेत बड़ी मात्रा में उपकरण बरामद
कार्रवाई के दौरान बरामद 77 एंटीना और अन्य नेटवर्किंग उपकरणों से इस सिस्टम के तकनीकी ढांचे का अंदाजा लगाया जा रहा है। इसके अलावा दो SIM Box, राउटर, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भी जांच टीम के हाथ लगा है।
अब इन उपकरणों की फोरेंसिक और तकनीकी जांच के जरिए कॉलिंग पैटर्न, कनेक्टिविटी, इस्तेमाल किए गए SIM कार्ड और नेटवर्क से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसियों के लिए इन उपकरणों से मिलने वाला डेटा आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
स्थानीय स्तर पर कौन-कौन जुड़ा था, इसकी जांच
STF अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। विशेष रूप से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि SIM कार्ड की व्यवस्था कौन करता था, तकनीकी उपकरण किसने उपलब्ध कराए और नेटवर्क को संचालित करने की जिम्मेदारी किसके पास थी।
इसके साथ ही जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के जरिए केवल कॉलिंग की जा रही थी या इसे साइबर ठगी, फर्जी कॉल सेंटर, डिजिटल अरेस्ट अथवा अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल किया गया।
साइबर अपराध के बदलते तरीके पर STF की नजर
SIM Box आधारित अवैध टेलीकॉम नेटवर्क का खुलासा यह भी बताता है कि साइबर अपराधी अब केवल इंटरनेट और सोशल मीडिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टेलीकॉम सिस्टम की तकनीकी कमजोरियों का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
उत्तराखंड STF की साइबर कुमाऊं यूनिट की यह कार्रवाई इसी बदलते साइबर अपराध के पैटर्न की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बरामद उपकरणों और SIM कार्ड की जांच के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा संभावित साइबर अपराधों के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल STF की जांच नेटवर्क की पूरी कड़ी, विदेशी कनेक्शन, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और संभावित साइबर अपराधों से इसके संबंधों पर केंद्रित है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस अवैध टेलीकॉम गेटवे से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।

