19.09.2026।
देहरादून। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा UPI अब उत्तराखंड के कई कारोबारियों के बीच चिंता का विषय बनता दिखाई दे रहा है। अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच व्यापारियों का एक वर्ग बड़े लेनदेन में UPI से दूरी बनाने लगा है। कई दुकानदार ग्राहकों से बड़े भुगतान नकद में लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कारोबारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान ने रोजमर्रा के कारोबार को काफी आसान बनाया है। ग्राहक मोबाइल से कुछ ही सेकंड में भुगतान कर देता है और दुकानदार को खुले पैसे रखने की जरूरत भी कम हो जाती है। हालांकि, यदि बड़े भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो इसका सीधा असर कारोबार की लागत पर पड़ने की आशंका है।
बड़े भुगतान को लेकर बढ़ी सतर्कता
व्यापारियों के बीच सबसे ज्यादा चिंता 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन को लेकर है। इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, ऑटो पार्ट्स, होटल-रेस्तरां और अन्य क्षेत्रों में एक ही बिल की राशि अक्सर इस सीमा से ऊपर पहुंच जाती है। ऐसे में कारोबारी किसी भी संभावित अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए ग्राहकों को नकद भुगतान का विकल्प बताने लगे हैं।
कुछ दुकानदारों ने बड़े बिलों के भुगतान के लिए कैश को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। वहीं, कई कारोबारी अभी अंतिम नियम और शुल्क की स्पष्ट जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
व्यापारियों की चिंता—कम मार्जिन वाले कारोबार पर पड़ेगा असर
व्यापारियों का तर्क है कि छोटे और मध्यम कारोबार में पहले से ही मुनाफे का मार्जिन सीमित रहता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर किसी तरह का शुल्क बढ़ने से अतिरिक्त लागत कारोबारी के मुनाफे को प्रभावित कर सकती है। कारोबारियों का यह भी कहना है कि यदि शुल्क ग्राहक से वसूला गया तो डिजिटल भुगतान की सुविधा महंगी पड़ सकती है और इसका असर ग्राहकों के व्यवहार पर भी दिखाई दे सकता है।
UPI से बनी आदत, अब कैश की ओर रुख
पिछले कुछ वर्षों में UPI ने बाजार में भुगतान का तरीका काफी बदल दिया है। सब्जी से लेकर बड़े सामान की खरीदारी तक मोबाइल भुगतान आम हो चुका है। कई दुकानों पर नकदी की जरूरत लगभग खत्म हो गई थी। लेकिन MDR को लेकर चल रही चर्चाओं ने व्यापारियों के बीच फिर से नकद लेनदेन को लेकर रुचि बढ़ा दी है।
हालांकि, सभी कारोबारी UPI बंद करने के पक्ष में नहीं हैं। कुछ व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक अब डिजिटल भुगतान का आदी हो चुका है और पूरी तरह नकद व्यवस्था पर लौटना व्यावहारिक नहीं होगा। इसलिए वे छोटे भुगतान में UPI और बड़े भुगतान में नकद जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
अंतिम नियम स्पष्ट होने का इंतजार
व्यापारियों के बीच असमंजस का एक बड़ा कारण यह भी है कि MDR से संबंधित प्रस्ताव, नियम और उसके लागू होने की वास्तविक स्थिति को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आ रही हैं। कारोबारी संगठनों की नजर अब आधिकारिक स्पष्टीकरण पर है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क लागू किया जाना है तो इसकी शर्तें, शुल्क की दर और जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से बताई जानी चाहिए। उनका कहना है कि नियमों की स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद ही कारोबारी अपने भुगतान सिस्टम में कोई स्थायी बदलाव कर पाएंगे।
ग्राहकों पर भी पड़ सकता है असर
यदि बड़े डिजिटल भुगतान पर शुल्क लागू होता है, तो इसका असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। कारोबारियों के व्यवहार में बदलाव आने पर ग्राहकों को भी बड़े भुगतान के लिए नकद की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। इससे उन ग्राहकों के लिए परेशानी बढ़ सकती है जो खरीदारी के दौरान UPI को प्राथमिकता देते हैं।
फिलहाल उत्तराखंड के बाजारों में कारोबारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। MDR को लेकर आधिकारिक स्थिति साफ होने के बाद ही यह तय होगा कि UPI के इस्तेमाल में वास्तविक बदलाव कितना आता है और व्यापारियों का नकद भुगतान की ओर बढ़ता रुझान कितना स्थायी रहता है।

