देहरादून ; 23.10.2026,
देवभूमि की अतिथि सत्कार परंपरा और आपसी सौहार्द को बताया उत्तराखंड की पहचान, सकारात्मक संवाद के साथ आगे बढ़ने पर दिया जोर
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसिद्ध पंजाबी गायक दलेर मेहंदी से फोन पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान दोनों के बीच पिछले दिनों हुए घटनाक्रम को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बातचीत के माध्यम से आपसी संवाद, सौहार्द और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति, आत्मीय व्यवहार और अतिथियों के सम्मान की परंपरा के लिए भी है। देवभूमि में सदियों से ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना को महत्व दिया जाता रहा है। यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान करना और आपसी सद्भाव बनाए रखना राज्य की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति समाज को जोड़ने का काम करती हैं। कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की परंपराओं, विचारों और भावनाओं को लोगों तक पहुंचाते हैं। उत्तराखंड में भी कला, संगीत और कलाकारों के प्रति हमेशा सम्मान का भाव रहा है। राज्य की यही उदार सांस्कृतिक परंपरा उसकी विशिष्ट पहचान को मजबूत बनाती है।
संवाद और सौहार्द से आगे बढ़ने का संदेश
मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया कि हालिया घटनाक्रम को पीछे छोड़ते हुए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना जरूरी है। आपसी बातचीत और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने से परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभालने का रास्ता निकलता है। उन्होंने सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने और संवाद के जरिए आगे बढ़ने की भावना व्यक्त की।
इस बातचीत को उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं, अतिथि सम्मान और आपसी सद्भाव के महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि देवभूमि की पहचान प्रेमपूर्ण व्यवहार, पारस्परिक सम्मान और सकारात्मक सोच से है। ऐसे मूल्यों को बनाए रखना समाज में बेहतर संबंधों और सौहार्दपूर्ण वातावरण के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने वक्तव्य के माध्यम से यह भी रेखांकित किया कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और आतिथ्य की परंपरा राज्य की अमूल्य धरोहर है। इसे बनाए रखते हुए हर परिस्थिति में संवाद और सम्मान की भावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

