देहरादून ; 5 नवम्बर 2026,
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास, संघर्ष और आंदोलनकारियों के त्याग को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी एवं जननायक स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा के जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। ‘रणजीत सिंह वर्मा : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की निर्णायक लड़ाई के एक जननायक’ शीर्षक से प्रकाशित इस पुस्तक में उनके जीवन संघर्ष, राजनीतिक सफर और पृथक उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण में निभाई गई भूमिका को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए चले लंबे आंदोलन में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक व्यक्ति के जीवन का परिचय नहीं कराती, बल्कि उस दौर की परिस्थितियों, जनभावनाओं और संघर्ष की कहानी भी सामने लाती है, जब उत्तराखण्ड की जनता अपने अलग राज्य के अधिकार के लिए एकजुट होकर सड़कों पर उतरी थी।
मुख्यमंत्री ने पुस्तक के लेखन और प्रकाशन से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी तथा अजय वर्मा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं और आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुभवों को लिखित रूप में सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है। इससे आने वाली पीढ़ियां यह समझ सकेंगी कि आज जिस उत्तराखण्ड की पहचान एक अलग राज्य के रूप में है, उसके पीछे कितने लोगों का संघर्ष, समर्पण और त्याग जुड़ा हुआ है।
आंदोलन को संगठित करने में निभाई अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि रणजीत सिंह वर्मा ने उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष के रूप में आंदोलन को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने अलग-अलग संगठनों और आंदोलनकारियों को एकजुट कर पृथक राज्य की मांग को व्यापक जनसमर्थन दिलाने का काम किया। वर्ष 1995-96 के दौरान देहरादून में आंदोलन को सक्रिय बनाए रखने के साथ उन्होंने आगे भी संघर्ष की गतिविधियों में अपनी भागीदारी जारी रखी।
आंदोलन के दौरान बंद, चक्का जाम, जेल भरो और रेल रोको जैसे कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि डोईवाला के प्रेमनगर बाजार में स्थित उनकी ससुराल आंदोलनकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण ठिकाने के रूप में इस्तेमाल होती थी। यहां पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले आंदोलनकारियों के ठहरने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग दिया जाता था। इस तरह उन्होंने आंदोलन को केवल नेतृत्व ही नहीं दिया, बल्कि जमीनी स्तर पर सहयोग और संगठन का दायित्व भी निभाया।
राज्य निर्माण के पीछे रहा लंबा संघर्ष
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड का गठन किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि वर्षों तक चले जनआंदोलन का परिणाम था। पृथक राज्य की मांग पहाड़ के लोगों की आकांक्षाओं, पहचान और विकास से जुड़ी हुई थी। खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान प्रदेशवासियों को कई पीड़ादायक परिस्थितियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद आंदोलनकारियों ने अपने लक्ष्य से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने कहा कि असंख्य लोगों के संघर्ष और बलिदान के बाद 9 नवंबर 2000 को उत्तराखण्ड देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। यह दिन प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और इसके पीछे उन सभी आंदोलनकारियों का योगदान है, जिन्होंने अलग राज्य के सपने को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
विधायक रहने के बावजूद राज्य निर्माण का संकल्प रखा सर्वोपरि
रणजीत सिंह वर्मा के राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वह अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने गए थे। इसके बावजूद उन्होंने पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग और आंदोलन के उद्देश्य को प्राथमिकता दी। राज्य गठन के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखी और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनका जीवन जनसेवा, विचारों के प्रति प्रतिबद्धता और व्यक्तिगत हितों से ऊपर सामाजिक उद्देश्य को रखने की प्रेरणा देता है।
आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाना जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलन के इतिहास को याद करना तभी सार्थक होगा, जब प्रदेश को उन उद्देश्यों के अनुरूप आगे बढ़ाया जाए, जिनके लिए आंदोलनकारियों ने संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध उत्तराखण्ड का निर्माण सभी की साझा जिम्मेदारी है। सरकार प्रदेश में सुशासन, रोजगार के अवसरों में वृद्धि, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास योजनाओं का लाभ आम नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसा उत्तराखण्ड तैयार करना आवश्यक है, जहां युवाओं को अपने ही प्रदेश में बेहतर भविष्य बनाने के अवसर मिलें, मातृशक्ति आर्थिक रूप से मजबूत बने और विकास की प्रक्रिया में हर क्षेत्र तथा प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो। यही राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के सपनों को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के सभी शहीदों को नमन किया और आंदोलन में योगदान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा जैसे आंदोलनकारियों के जीवन और कार्यों को संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों को अपने राज्य के इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

