देहरादून ; 28.10.2026,
देहरादून। उत्तराखण्ड में मौसम संबंधी सूचनाओं की सटीकता बढ़ाने और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) की ओर से महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी क्रम में मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून में सतही क्षेत्रीय वेधशालाओं (एसएफओ) में तैनात प्रेक्षकों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के सभी 13 जनपदों में स्थापित 25 वेधशालाओं के प्रेक्षकों को मौसम संबंधी आंकड़ों के व्यवस्थित संकलन, सही अभिलेखीकरण, ऑनलाइन प्रविष्टि और निर्धारित समय पर आंकड़े भेजने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मौसम संबंधी उपकरणों के बेहतर संचालन के साथ उनसे प्राप्त आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना और सूचनाओं के आदान-प्रदान में होने वाली देरी को कम करना रहा। उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा संवेदनशीलता को देखते हुए मौसम के आंकड़ों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से बारिश, भारी वर्षा और मौसम में अचानक होने वाले बदलावों की जानकारी समय पर उपलब्ध होने से संबंधित विभागों को परिस्थितियों का आकलन करने और आवश्यक तैयारियां करने में मदद मिलती है।
आपदा प्रबंधन में समय पर सूचना उपलब्ध होना जरूरी
यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि उत्तराखण्ड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में मौसम के सटीक और समयबद्ध आंकड़े आपदा पूर्व तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी जारी करने तथा राहत एवं बचाव कार्यों से जुड़े निर्णयों के लिए बेहद अहम हैं। उन्होंने कहा कि सतही क्षेत्रीय वेधशालाओं में तैनात प्रेक्षक मौसम संबंधी सूचनाओं को जुटाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके द्वारा दर्ज किए गए आंकड़ों की शुद्धता और समय पर प्रेषण का सीधा महत्व आगे की निगरानी एवं विश्लेषण में होता है।
उन्होंने प्रेक्षकों को निर्देशित किया कि वे निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार मौसम का अवलोकन करें और प्राप्त जानकारी को सावधानीपूर्वक दर्ज करते हुए संबंधित माध्यमों से भेजें। आंकड़ों में किसी प्रकार की त्रुटि या उनके प्रेषण में देरी से मौसम की स्थिति का आकलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए प्रत्येक स्तर पर निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है।
उपकरणों की खराबी और तकनीकी समस्याओं की सूचना तत्काल देने के निर्देश
कार्यक्रम के दौरान वेधशालाओं में उपलब्ध मौसम संबंधी उपकरणों, वहां मौजूद सुविधाओं और नियमित कामकाज में सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। प्रकाश चंद्र ने प्रेक्षकों से जानकारी ली कि उपकरणों के संचालन, आंकड़ों के संकलन और उन्हें ऑनलाइन अपलोड करने में किस तरह की समस्याएं सामने आती हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी उपकरण में खराबी आती है, आंकड़े भेजने में तकनीकी बाधा उत्पन्न होती है या कामकाज से जुड़ी कोई अन्य समस्या सामने आती है, तो इसकी जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए। समय रहते समस्या की सूचना मिलने से आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकती है और मौसम संबंधी आंकड़ों की नियमित उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
मानसून में वर्षा के आंकड़ों की बढ़ जाती है अहमियत
मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के निदेशक सी.एस. तोमर ने प्रशिक्षण के दौरान वर्षा के आंकड़ों के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली बारिश का आकलन करने, भारी वर्षा की घटनाओं पर नजर रखने और आपदा प्रबंधन से जुड़े निर्णय लेने में इन आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
उन्होंने प्रेक्षकों से कहा कि वे निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप नियमित प्रेक्षण करें और आंकड़ों को दर्ज करने से लेकर उनके प्रेषण तक हर चरण में सावधानी बरतें। मौसम संबंधी जानकारी का सही और व्यवस्थित संकलन होने से संबंधित अधिकारियों को क्षेत्रवार वर्षा की स्थिति समझने तथा संभावित जोखिमों के अनुरूप तैयारियां करने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों ने साझा की तकनीकी जानकारी
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिक रोहित थपलियाल, यूएसडीएमए के डॉ. राजेश कुमार विश्वकर्मा तथा प्रशिक्षक विपिन रावत और अनुराग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से प्रेक्षकों को उनके नियमित कार्यों से संबंधित प्रक्रियाओं, आंकड़ों की गुणवत्ता बनाए रखने और तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।
इस पहल के जरिए प्रदेश की सभी 25 सतही क्षेत्रीय वेधशालाओं से प्राप्त मौसम संबंधी सूचनाओं को अधिक व्यवस्थित, विश्वसनीय और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया गया। मौसम के आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होने से आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को निगरानी, पूर्व तैयारी और आवश्यक निर्णय लेने के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।

