देहरादून ; 06.10.2026,
नगांव। असम के नगांव में मंगलवार की सुबह लोगों की नींद भूकंप के झटकों से प्रभावित हुई। करीब साढ़े चार बजे से पहले आए इस भूकंप की तीव्रता 4.5 दर्ज की गई। झटके ऐसे समय महसूस किए गए जब अधिकांश लोग अपने घरों में थे, जिसके चलते कुछ इलाकों में अचानक बेचैनी और घबराहट का माहौल बन गया।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप का समय सुबह 4:23:47 बजे दर्ज किया गया। इसकी उत्पत्ति जमीन के भीतर करीब 33 किलोमीटर की गहराई में हुई। भूकंप का केंद्र नगांव क्षेत्र में स्थित बताया गया है।
अचानक महसूस हुए कंपन, लोगों में बढ़ी चिंता
सुबह के शांत माहौल के बीच धरती में कंपन महसूस होने के बाद लोगों को कुछ समय के लिए स्थिति को लेकर चिंता हुई। हालांकि, भूकंप का झटका गुजरने के बाद हालात सामान्य रहे। अभी तक किसी बड़े नुकसान, इमारत गिरने या किसी व्यक्ति के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं। किसी भी तरह की क्षति की जानकारी मिलने पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
पूर्वोत्तर में भूकंप कोई नई घटना नहीं
असम समेत पूरा पूर्वोत्तर भारत भूकंपीय गतिविधियों वाले क्षेत्रों में आता है। यहां धरती के भीतर होने वाली टेक्टोनिक हलचल के कारण समय-समय पर भूकंप दर्ज किए जाते हैं। कई बार ये झटके इतने हल्के होते हैं कि लोगों को इनका अहसास तक नहीं होता, जबकि कुछ मौकों पर कंपन काफी स्पष्ट रूप से महसूस किए जाते हैं।
नगांव में आया ताजा भूकंप भी इसी क्षेत्र में जारी भूकंपीय गतिविधियों की एक और कड़ी के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि किसी भूकंप के प्रभाव का अंदाजा केवल उसकी तीव्रता देखकर नहीं लगाया जा सकता। उसकी गहराई, केंद्र से दूरी और स्थानीय निर्माण की स्थिति भी नुकसान की संभावना तय करती है।
कुछ दिन पहले भी हिली थी जमीन
पूर्वोत्तर क्षेत्र में भूकंप की गतिविधि हाल के दिनों में भी दर्ज हुई है। शनिवार शाम 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका असर असम के कुछ हिस्सों के अलावा गुवाहाटी में भी महसूस किया गया था।
उस भूकंप का केंद्र भूटान के ग्याल्पोझिंग के नजदीक बताया गया था। NCS के अनुसार, इसकी गहराई करीब 5 किलोमीटर थी। उस घटना के बाद भी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली थी।
विशेषज्ञों की नजर में क्यों अहम है असम?
असम और आसपास का क्षेत्र भूकंपीय रूप से सक्रिय इलाकों में गिना जाता है। भारतीय प्लेट और आसपास की टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण इस पूरे क्षेत्र में जमीन के भीतर हलचल होती रहती है। यही वजह है कि यहां छोटे-बड़े भूकंप समय-समय पर दर्ज होते रहते हैं।
मंगलवार के भूकंप के बाद फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। फिर भी भूकंप संभावित इलाकों में लोगों के लिए जरूरी है कि वे आपदा से बचाव के बुनियादी उपायों से परिचित रहें और झटके आने पर घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रहें।

