देहरादून ; 14.09.2026।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन-1905 की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार के पास पहुंचने वाली हर शिकायत किसी न किसी नागरिक की वास्तविक समस्या से जुड़ी होती है, इसलिए उसे केवल एक फाइल या ऑनलाइन दर्ज मामले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। शिकायत का समाधान समयसीमा के भीतर और प्रभावी तरीके से करना संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी होगी।
मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान अधिकारियों से शिकायतों की प्रगति की जानकारी लेने के साथ ही यह भी परखा कि वास्तव में लोगों को राहत मिली है या नहीं। उन्होंने कुछ शिकायतकर्ताओं से स्वयं फोन पर बातचीत कर समस्या की मौजूदा स्थिति जानी। इस दौरान शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया, अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई और शिकायतकर्ता की संतुष्टि को सीधे समझने का प्रयास किया गया।
जिन मामलों में शिकायत के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई थी या समाधान में अनावश्यक देरी सामने आई, मुख्यमंत्री ने उन्हें गंभीरता से लिया। संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने और शिकायतों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने साफ किया कि किसी शिकायत को सिर्फ औपचारिक जवाब देकर बंद कर देना प्रशासनिक जिम्मेदारी की पूर्ति नहीं मानी जाएगी।
शिकायतकर्ता से सीधे फीडबैक लेकर परखी व्यवस्था
सीएम हेल्पलाइन-1905 की समीक्षा में मुख्यमंत्री धामी ने शिकायत निस्तारण की जमीनी स्थिति जानने के लिए शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद को भी महत्व दिया। जिन लोगों की समस्याएं हल हो चुकी थीं, उनसे बातचीत कर यह जाना गया कि उन्हें वास्तव में कितनी राहत मिली और हेल्पलाइन के माध्यम से की गई कार्रवाई उनके लिए कितनी उपयोगी रही।
समाधान से संतुष्ट शिकायतकर्ताओं ने त्वरित सहायता मिलने पर सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि तकनीक आधारित शिकायत प्रणाली तभी प्रभावी हो सकती है, जब उसके पीछे जिम्मेदार अधिकारी सक्रियता से काम करें और समस्या के समाधान तक मामले की निगरानी जारी रखें।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों को निस्तारित करने की प्रक्रिया में संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों दिखाई देनी चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि सरकार और जनता के बीच संवाद को मजबूत बनाने में सीएम हेल्पलाइन-1905 महत्वपूर्ण माध्यम है और इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।
15 अक्टूबर तक सड़कों की मरम्मत का लक्ष्य
समीक्षा बैठक में प्रदेश की सड़कों की स्थिति भी प्रमुखता से उठी। मुख्यमंत्री धामी ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़कों की खराब स्थिति को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित कर मरम्मत का काम तेजी से कराया जाए और 15 अक्टूबर तक सड़कों को दुरुस्त करने का लक्ष्य पूरा किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को मैदानी स्तर पर निगरानी बढ़ाने तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सड़क से जुड़ी समस्याओं का असर सीधे आम लोगों के आवागमन पर पड़ता है, इसलिए इस मामले में केवल कागजी प्रगति पर्याप्त नहीं होगी। कार्य की वास्तविक स्थिति की लगातार समीक्षा करने और जहां जरूरत हो वहां तत्काल हस्तक्षेप करने को कहा गया।
पेयजल व्यवस्था में भी जवाबदेही तय
मुख्यमंत्री ने स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को लेकर भी अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता के साथ लिया जाए और जलापूर्ति बाधित होने, पाइपलाइन में लीकेज या अन्य तकनीकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए।
पाइपलाइन और सीवर लाइनों की मौजूदा स्थिति की व्यापक जांच के लिए 15 दिन के भीतर ऑडिट पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल खराब लाइनों की पहचान करना नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों में स्थायी सुधार की दिशा में कदम उठाना भी है जहां बार-बार जलापूर्ति या सीवर से जुड़ी शिकायतें सामने आती हैं।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि किसी इलाके में पेयजल संकट या लीकेज की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई के लिए लोगों को बार-बार शिकायत न करनी पड़े। संबंधित विभाग समस्या की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर समाधान की प्रक्रिया शुरू करें।
लापरवाही करने वालों पर तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनशिकायतों का निस्तारण सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। सीएम हेल्पलाइन-1905 पर आने वाली शिकायतों की लगातार निगरानी की जाएगी और उनके निस्तारण की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि शिकायतों को लंबित रखने, मामले को दूसरे स्तर पर भेजकर जिम्मेदारी से बचने अथवा बिना वास्तविक समाधान के औपचारिक कार्रवाई दर्ज करने की प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिस स्तर पर लापरवाही सामने आएगी, वहां संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रशासन को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और परिणाम आधारित बनाने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं और व्यवस्थाओं का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होता है कि आम नागरिक को उसका कितना लाभ मिल रहा है। इसी सोच के साथ सीएम हेल्पलाइन-1905 की शिकायतों से लेकर सड़क, पेयजल और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े मामलों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

