देहरादून ; 23.08.2026,
देहरादून। बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी के जरिए कीमतों पर असर डालने की आशंका को रोकने के लिए सरकार ने भंडारण व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठाया है। उत्तराखंड में अब बड़े थोक खरीदार अपनी सामान्य खपत के आधार पर अधिकतम 15 दिनों की जरूरत के बराबर ही चीनी का स्टॉक रख सकेंगे। निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण पाए जाने पर संबंधित कारोबारी या संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
केंद्र से मिले निर्देशों के बाद उत्तराखंड के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सभी जिलों के पूर्ति अधिकारियों को इस व्यवस्था की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का फोकस ऐसे कारोबारियों और संस्थानों पर रहेगा, जिनकी चीनी की खपत सामान्य खरीदारों की तुलना में काफी अधिक है।
किन खरीदारों पर लागू होगा नियम
यह व्यवस्था उन बड़े खरीदारों के लिए है, जो उत्पादन, नियमित व्यावसायिक उपयोग या कच्चे माल के तौर पर हर महीने 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक चीनी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खरीदारों को अपनी औसत खपत के हिसाब से स्टॉक रखना होगा और 15 दिन की आवश्यकता से अधिक चीनी गोदाम में जमा नहीं की जा सकेगी।
मसलन, किसी संस्थान या कारोबारी की निर्धारित अवधि में खपत जितनी बनती है, उसके अनुरूप ही भंडारण की अनुमति होगी। जरूरत से ज्यादा माल लंबे समय तक गोदाम में रखने पर विभागीय जांच का सामना करना पड़ सकता है।
जिलों में होगी स्टॉक की निगरानी
नए निर्देशों के तहत जिला पूर्ति अधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारी बड़े खरीदारों के स्टॉक पर नजर रखेंगे। जरूरत पड़ने पर गोदामों में उपलब्ध चीनी की मात्रा, खरीद और खपत से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी की जा सकती है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि बाजार की नियमित आपूर्ति प्रभावित न हो और किसी स्तर पर अनावश्यक रूप से बड़ी मात्रा में चीनी रोककर न रखी जाए।
कीमतों पर नियंत्रण की कोशिश
चीनी जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली वस्तु में अचानक कमी या बड़े पैमाने पर स्टॉक रोकने से बाजार में कीमतों पर दबाव बन सकता है। सरकार की नई व्यवस्था इसी संभावना को सीमित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। तय सीमा में स्टॉक रहने से बाजार में चीनी की आवाजाही बनी रहने की उम्मीद है और कृत्रिम कमी पैदा करने की गुंजाइश कम होगी।
बड़े खरीदारों के लिए अब स्टॉक प्रबंधन पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। उन्हें अपनी खपत का आकलन करते हुए खरीद और भंडारण की योजना बनानी होगी, ताकि निर्धारित 15 दिन की सीमा का उल्लंघन न हो।
विभागीय कार्रवाई की रहेगी नजर
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। यदि जांच के दौरान तय सीमा से अधिक चीनी का भंडार मिलता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में थोक कारोबारियों और बड़े उपभोक्ताओं को अपने स्टॉक रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने के साथ-साथ वास्तविक खपत के अनुरूप ही माल रखने पर ध्यान देना होगा।
सरकार के इस कदम से जहां चीनी की आपूर्ति को नियमित रखने की कोशिश होगी, वहीं बड़े स्तर पर अनावश्यक भंडारण और संभावित जमाखोरी पर भी अंकुश लगाने का प्रयास किया जाएगा।

