देहरादून ; 22.08.2026,
देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया अब जांच और सुनवाई के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। इसी क्रम में निर्वाचन विभाग ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जमीनी स्तर पर चल रही कार्रवाई की जानकारी साझा की। बैठक में केवल आंकड़ों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि मतदाताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई, अधिकारियों की निगरानी और राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि ड्राफ्ट रोल में करीब 71 लाख मतदाता शामिल हैं। पुनरीक्षण के दौरान करीब 24 लाख नाम ऐसे सामने आए, जिनमें मैपिंग नहीं हो पाई या किसी तरह की विसंगति मिली। ऐसे मतदाताओं को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।
निर्वाचन विभाग के अनुसार नोटिस जारी होने के बाद सुनवाई की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी है। 15 लाख से अधिक मामलों में सुनवाई पूरी की जा चुकी है, जबकि शेष मामलों की जांच और कार्रवाई जारी है। यानी बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की अब अधिकारियों द्वारा पड़ताल की जा चुकी है और बाकी मामलों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत देखा जा रहा है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ी
एसआईआर की प्रक्रिया बड़े पैमाने पर संचालित होने के कारण इसकी निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। निर्वाचन विभाग ने 9 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को पर्यवेक्षण अधिकारी के तौर पर अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है। इन अधिकारियों की भूमिका प्रक्रिया की निगरानी करने, संबंधित स्तर पर सामने आने वाले मामलों पर नजर रखने और यह सुनिश्चित करने से जुड़ी है कि निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई हो।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों को भरोसा दिलाया कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत संचालित की जा रही है। उनका जोर इस बात पर रहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों की जांच में प्रक्रिया स्पष्ट रहे और संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले।
राजनीतिक दलों की भूमिका भी अहम
बैठक में शामिल राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने एसआईआर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने सुझाव रखे। निर्वाचन विभाग की ओर से इन सुझावों को सुना गया और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के साथ संवाद बनाए रखने पर जोर दिया गया।
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भूमिका इस प्रक्रिया में इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वे अपने स्तर पर मतदाता सूची से जुड़े मामलों और स्थानीय स्तर की समस्याओं को निर्वाचन विभाग के सामने रख सकते हैं। बैठक के माध्यम से विभाग और दलों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने की कोशिश भी नजर आई।
बैठक में सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के साथ भाजपा से अनिल गोयल और राजकुमार पुरोहित, कांग्रेस से मनोज रावत व मौ० सुलेमान अंसारी, बसपा से सत्यपाल, सतेंद्र, जसपाल और सतेंद्र चोपड़ा, आम आदमी पार्टी से श्याम बाबू पांड्य तथा सीपीआई (एम) से अनंत आकाश मौजूद रहे।
निर्वाचन विभाग के सामने अब अगली चुनौती शेष मामलों की सुनवाई पूरी करने की है। विभाग का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है। ऐसे में आने वाले चरणों में शेष नोटिस वाले मामलों की जांच और सुनवाई पर खास नजर रहेगी।

